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देवभोग में सरकारी आवासों पर कब्जे का खेल: एसडीएम खुद बेघर, निलंबित अफसर समेत कई कर्मियों ने नहीं छोड़ा क्वार्टर नियमों को ताक पर रखकर आवासों पर कब्जा, रिकॉर्ड तक गायब जांच के निर्देश, कार्रवाई की तैयारी

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

देवभोग_ सरकारी आवासों के आबंटन में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जहां आवास आवंटन के लिए अधिकृत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) खुद ही सरकारी सुविधा से वंचित हैं, जबकि निलंबित अधिकारी सहित कई कर्मचारी नियमों के विपरीत आवासों पर कब्जा जमाए हुए हैं। स्थिति यह है कि अनुविभाग के वर्तमान एसडीएम आर.एस. सोरी पिछले छह महीनों से पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस या लॉज में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें हाल ही में मैनपुर एसडीएम का अतिरिक्त प्रभार भी मिला, लेकिन वहां भी उन्हें सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका।

निलंबित अफसर का अब भी दो आवासों पर कब्जा

सूत्रों के अनुसार, निलंबित अपर कलेक्टर तुलसीदास मरकाम दोनों अनुविभागों से दूर होने के बावजूद हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के दो आवासों पर अब भी कब्जा बनाए हुए हैं। शीर्ष स्तर पर कार्रवाई न होने से अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी नियमों की अनदेखी कर आवासों का लाभ उठा रहे हैं।

42 में से आधे आवासों पर अवैध कब्जा

देवभोग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के कुल 42 आवासों में से करीब आधे पर नियम विरुद्ध कब्जा बताया जा रहा है। हाउस रेंट जमा नहीं होने के कारण रखरखाव कार्य भी प्रभावित हो रहा है। बताया जा रहा है कि पूर्व जनपद सीईओ, आरईएस एसडीओ आर.के. शर्मा, नायब तहसीलदार अजय देवांगन, लिपिक संतanu बांधे और नाजिर गौरांग बरिहा सहित कई अधिकारी-कर्मी अब भी आवास खाली नहीं कर रहे हैं।

स्थानांतरण के बाद भी नहीं छोड़ा आवास

मामले में यह भी सामने आया है कि स्वास्थ्य विभाग में पूर्व बीएमओ रहे डॉ. सुनील रेड्डी, जिनकी वर्तमान पदस्थापना गरियाबंद में नोडल अधिकारी के रूप में है और वहां उन्हें आवास भी आवंटित है, वे भी देवभोग में सरकारी आवास पर कब्जा जमाए हुए हैं।

अपात्र लोगों को भी मिला आवास

हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आवंटन प्रक्रिया में भारी अनियमितता उजागर हुई है। 20 से अधिक ऐसे कर्मचारी भी सरकारी आवासों में रह रहे हैं, जिन्हें हाउस रेंट की पात्रता ही नहीं है।कुछ मामलों में पति-पत्नी के नाम पर अलग-अलग आवास कब्जे में रखने की बात सामने आई है, जबकि कई आवासों में ताला लगाकर केवल कब्जा बनाए रखा गया है। शिक्षक और पंचायत सचिव तक नियमों को दरकिनार कर आवासों में रह रहे हैं।

रिकॉर्ड तक नहीं, पारदर्शिता पर सवाल

सबसे गंभीर बात यह है कि आवास आवंटन से जुड़े दस्तावेज एसडीएम कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं। इससे पूरे आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रशासन ने मानी गंभीरता, जांच के निर्देश

अपर कलेक्टर पंकज डाहरे ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि एसडीएम को टीम गठित कर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी मामलों की सूची तैयार की जाएगी, जिनमें स्थानांतरण के बाद भी आवास खाली नहीं किए गए या अपात्र व्यक्तियों को आवंटन किया गया है, और शीघ्र ही उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


देवभोग में सरकारी आवासों के दुरुपयोग का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जहां एक ओर जिम्मेदार अधिकारी आवास के अभाव में परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर नियमों की अनदेखी कर प्रभावशाली लोग सरकारी संसाधनों का लाभ उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रस्तावित जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।