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बाहर से चमकदार, अंदर से जर्जर! कोसमकानी पंचायत में पुलिया मरम्मत के नाम पर बड़ा खेल? एक पुल पर दिखावटी मरम्मत, दूसरे पर कागजों में ही खर्च हुआ ₹99,850!

ऊपरपीटा–केन्दूवन मार्ग की दो पुलियों पर उठे गंभीर सवाल। कहीं ऊपर से लीपापोती कर मरम्मत का दावा, तो कहीं कागजों में लाखों का खर्च, लेकिन मौके पर काम के निशान तक नहीं। आखिर सरकारी राशि का हिसाब कौन देगा?


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद | विशेष खोजी रिपोर्ट
देवभोग विकासखंड की ग्राम पंचायत कोसमकानी एक बार फिर निर्माण कार्यों को लेकर सवालों के घेरे में है। ऊपरपीटा–केन्दूवन मार्ग पर स्थित दो पुलियों की मरम्मत को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में मरम्मत और भुगतान का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। मौके पर जो स्थिति नजर आई, उसने सरकारी कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहला पुल: ऊपर फ्लोरिंग, नीचे पूरी पुलिया जर्जर

प्राथमिक शाला ऊपरपीटा के पास स्थित पुरानी पुलिया की मरम्मत के लिए 15वें वित्त से ₹99,850 खर्च दर्शाया गया है। लेकिन मौके पर देखने पर पुलिया का निचला हिस्सा, स्तंभ और दोनों किनारों की दीवारें क्षतिग्रस्त दिखाई देती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मजबूत मरम्मत करने के बजाय केवल ऊपर फ्लोरिंग कर ली गई, जिससे पुलिया बाहर से ठीक दिखती है, लेकिन उसकी असली स्थिति अंदर से बेहद कमजोर बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पुलिया से कोई भारी वाहन गुजरता है तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

दूसरा पुल: बिल तैयार, लेकिन मौके पर काम के निशान नहीं

ऊपरपीटा–केन्दूवन मार्ग की दूसरी पुलिया को लेकर आरोप और भी गंभीर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पुलिया की मरम्मत के नाम पर भी ₹99,850 का बिल तैयार किया गया, लेकिन मीडिया टीम के मौके पर पहुंचने पर वहां किसी प्रकार का नया निर्माण, मरम्मत या सामग्री के उपयोग के स्पष्ट प्रमाण दिखाई नहीं दिए। पुलिया आज भी बदहाल स्थिति में खड़ी है और राहगीरों, स्कूली बच्चों, किसानों तथा मवेशियों के लिए खतरा बनी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल

यदि दोनों पुलियों पर सरकारी राशि खर्च हुई है, तो जमीन पर उसका परिणाम क्यों दिखाई नहीं देता? यदि मरम्मत पूरी हो चुकी है, तो पुलिया आज भी जर्जर क्यों है? यदि कार्य पूर्ण हुआ है, तो उसका भौतिक प्रमाण कहां है? और यदि काम अधूरा है, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब पंचायत, तकनीकी अमले और संबंधित अधिकारियों को देना होगा।


ग्रामीण घनश्याम बीसी ने क्या कहा
ग्रामीण घनश्याम बीसी ने मीडिया से कहा, "मैं रोज इसी सड़क से आना-जाना करता हूं। पुलिया की हालत देखकर हमेशा डर लगा रहता है। मरम्मत के नाम पर करीब एक लाख रुपये खर्च होने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीन पर पुलिया आज भी जस की तस टूटी और जर्जर दिखाई देती है। हमें तो ऐसा लगता है कि कागजों में काम पूरा दिखा दिया गया, जबकि मौके पर कोई ठोस मरम्मत नजर नहीं आती। आप खुद आकर देख सकते हैं कि पुलिया की असली हालत क्या है। अगर समय रहते इसकी निष्पक्ष जांच और मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।"

पुराने निर्माण भी सवालों के घेरे में

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान सरपंच पिछले कार्यकाल में भी सरपंच थे। उसी दौरान इस मार्ग पर बने लगभग 7 पुल-पुलियों में से कई निर्माण दो से तीन वर्षों के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान कार्यकाल में भी पंचायत के कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत, जनपद पंचायत और संबंधित तकनीकी विभाग से मांग की है कि दोनों पुलियों की स्वतंत्र तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, गुणवत्ताहीन निर्माण या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों, सचिव, जनप्रतिनिधियों तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।