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टाइगर रिजर्व में दिखा संकटग्रस्त 'ढोल' का झुंड, कैमरा ट्रैप में कैद हुई दुर्लभ तस्वीरें

 

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद_उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग के अनुसार यह रिजर्व की बेहतर होती पारिस्थितिकी, मजबूत खाद्य-श्रृंखला और सफल संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। नंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग के अनुसार यह रिजर्व की बेहतर होती पारिस्थितिकी, मजबूत खाद्य-श्रृंखला और सफल संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग के अनुसार यह रिजर्व की बेहतर होती पारिस्थितिकी, मजबूत खाद्य-श्रृंखला और सफल संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। ढोल (Cuon alpinus) भारत के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल हैं। यह प्रजाति IUCN की रेड लिस्ट में Endangered (संकटग्रस्त) श्रेणी में दर्ज है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

ये हमेशा झुंड में रहकर शिकार करते हैं और अपनी सामूहिक रणनीति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।
वन अधिकारियों के अनुसार ढोल की मौजूदगी किसी भी जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है। यह चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित रखते हैं, जिससे वनों का प्राकृतिक पुनर्जनन बेहतर होता है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर उसका पुनर्स्थापन किया गया, वहीं 550 से अधिक शिकारियों, वन्यजीव अपराधियों और तस्करों की गिरफ्तारी की गई। इसके अलावा लगातार एंटी-पोचिंग अभियान, नियमित गश्त, कैमरा ट्रैप निगरानी और स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी से संरक्षण कार्यों को मजबूती मिली है।

वन विभाग का कहना है कि AITE-2026 के दौरान चार ढोलों का एक साथ रिकॉर्ड होना इस बात का प्रमाण है कि रिजर्व में संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयास अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। इससे स्पष्ट है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व मध्य भारत के महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

उप संचालक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने कहा कि "किसी भी वन क्षेत्र की सफलता केवल बाघों की मौजूदगी से नहीं, बल्कि संपूर्ण खाद्य-श्रृंखला और जैव-विविधता के स्वास्थ्य से आंकी जाती है। ढोल जैसे संकटग्रस्त मांसाहारी जीवों का संगठित झुंड इस जंगल की बढ़ती पारिस्थितिकीय मजबूती का सशक्त प्रमाण है।"