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गांव-गांव पहुंचा साइबर जागृति अभियान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों को बनाया गया साइबर दूत

पुलिस की अनोखी पहल से ग्रामीण महिलाओं को साइबर ठगी से बचाव के बताए गए तरीके, 1930 हेल्पलाइन की दी जानकारी


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद_छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय के आह्वान पर पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत गरियाबंद पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता की मुहिम तेज कर दी है। पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर के विशेष निर्देशन में बुधवार, 09 सितंबर 2026 को जिले के सभी थाना क्षेत्रों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस अभियान के तहत पुलिस की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और ग्रामीण महिलाओं से सीधे संवाद किया। चौपाल एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले नए-नए तरीकों की जानकारी दी गई और डिजिटल लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में समझाया गया।

छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में अपराधी लोगों को लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाकर अपने जाल में फंसाते हैं। बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, रिश्तेदार, सरकारी कर्मचारी या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर ठग लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।

पुलिस टीमों ने महिलाओं को समझाया कि OTP, ATM PIN, UPI PIN, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध लिंक, लॉटरी, इनाम, लोन या मुफ्त उपहार से जुड़े संदेशों से भी सावधान रहने की सलाह दी गई।

सोशल मीडिया पर भी बरतें सावधानी

कार्यक्रम में सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। महिलाओं को सलाह दी गई कि वे अपनी निजी तस्वीरें, व्यक्तिगत जानकारी और अन्य संवेदनशील विवरण अजनबियों के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया अकाउंट में मजबूत पासवर्ड रखने और संदिग्ध प्रोफाइल या मैसेज से दूरी बनाए रखने की जानकारी भी दी गई।

पुलिस ने यह भी बताया कि सरकारी योजना, सब्सिडी, पेंशन, बैंक खाते या किसी वित्तीय सहायता के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और संदेशों की जानकारी आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करने के बाद ही कोई कदम उठाएं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन बनेंगी ‘साइबर दूत’

गरियाबंद पुलिस की इस पहल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों को महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में जोड़ा गया है। पुलिस का मानना है कि इनका ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सीधा संपर्क होता है। ऐसे में इन्हें साइबर सुरक्षा की जानकारी देकर वे अपने साथ-साथ गांव के अन्य लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

कार्यक्रम के दौरान उन्हें ‘साइबर सखी’ और ‘साइबर दूत’ के रूप में काम करने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस ने उनसे अपील की कि वे अपने क्षेत्र में महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को ऑनलाइन ठगी के प्रति जागरूक करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।

ठगी होने पर घबराएं नहीं, तुरंत करें 1930 पर शिकायत

पुलिस ने साइबर अपराध का शिकार होने वाले लोगों को सबसे महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि ऑनलाइन ठगी होने पर बिना घबराए और बिना समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। इसके साथ ही नजदीकी थाना में भी इसकी सूचना दी जा सकती है।

पुलिस के अनुसार साइबर ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, उतनी ही जल्दी संबंधित रकम को रोकने या ब्लॉक कराने की संभावना बढ़ जाती है।

गरियाबंद पुलिस का ‘साइबर जागृति अभियान’ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य सिर्फ साइबर अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले ही लोगों को जागरूक और सतर्क बनाना है, ताकि गांव-गांव तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जा सके।

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