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GARIYABAND BREKING: पुष्पा बनने निकले सागौन तस्कर! नदी में लकड़ी छिपाकर ओडिशा भेजने की थी प्लानिंग, स्मार्ट सर्विलांस ने खोला पूरा राज....3 आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ और ओडिशा से जुड़े 3 आरोपी गिरफ्तार, नदी के बहाव से सागौन के लट्ठे ओडिशा ले जाने की थी योजना


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद_उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम, मानसून पेट्रोलिंग और मैदानी सूचना तंत्र के समन्वित उपयोग से छत्तीसगढ़ और ओडिशा से जुड़े अंतरराज्यीय सागौन तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल दाखिल कराया गया है, जबकि तस्करी नेटवर्क से जुड़े तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं।

यह कार्रवाई माननीय वन मंत्री केदार कश्यप, प्रधान मुख्य वन संरक्षक ओम प्रकाश यादव, क्षेत्र निदेशक गुरुनाथन एन तथा उपनिदेशक वरुण जैन के मार्गदर्शन में की गई।

नदी के बहाव से लकड़ी ओडिशा पहुंचाने की थी साजिश

मामले की शुरुआत 22 अगस्त 2026 को हुई। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उत्तर उदंती परिक्षेत्र की कुर्रुभाठा बीट के कक्ष क्रमांक-03 में नियमित गश्त के दौरान वन अमले को उदंती नदी के किनारे सागौन के एक पेड़ का कटा हुआ ठूंठ मिला।

मौके पर सागौन का एक लट्ठा भी अर्जुन के पेड़ की जड़ों से रस्सी के सहारे बंधा हुआ पाया गया। घटनास्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम सक्रिय कर क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी।

इसके बाद 26 अगस्त 2026 को स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम में दो संदिग्ध व्यक्ति सागौन के लट्ठे के आसपास गतिविधि करते हुए दिखाई दिए। तकनीकी निगरानी और मैदानी पतासाजी के आधार पर उनकी पहचान भोजलाल नागेश (38 वर्ष), निवासी बरगांव, मैनपुर तथा गंगाराम विश्वकर्मा (34 वर्ष), निवासी बरगांव, मैनपुर के रूप में हुई।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सागौन के पेड़ की अवैध कटाई कर उसके लट्ठे को उदंती नदी के बहाव के सहारे लकड़ी की बेड़ी के रूप में ओडिशा ले जाने की योजना बनाई थी।

मुख्य आरोपी के घर से हाथ आरा और साल चिरान बरामद

जांच के दौरान मुख्य आरोपी भोजलाल नागेश के खिलाफ सर्च वारंट तामील कर उसके घर की तलाशी ली गई। तलाशी में हाथ आरा और साल चिरान बरामद किए गए।

वन विभाग के अनुसार सागौन के लट्ठे को नदी के भीतर छिपाकर रखा गया था। वहीं आरोपी गंगाराम विश्वकर्मा की भूमिका भी तस्करी की योजना में सहभागी के रूप में सामने आई। मामले में 0.95 घनमीटर सागौन लट्ठा नदी के भीतर छिपाए जाने की जानकारी मिली।

ओडिशा से तीसरा आरोपी गिरफ्तार, तस्करी नेटवर्क की खुली परतें

मामले की आगे की जांच के दौरान तस्करी नेटवर्क से जुड़े शोभाचन्द्र नायक (50 वर्ष), निवासी ग्राम/तहसील सिनापाली, जिला सिनापाली, ओडिशा की भूमिका सामने आई।

गरियाबंद पुलिस के सहयोग से शोभाचन्द्र नायक को ओडिशा से गिरफ्तार किया गया। वन विभाग के अनुसार आरोपी पूर्व में भी वन अपराध प्रकरण में “WANTED” था।

जांच में उसकी भूमिका अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी नेटवर्क से जुड़ी पाई गई। विभाग के अनुसार शोभाचन्द्र नायक द्वारा छत्तीसगढ़ के व्यक्तियों/आरोपियों को सागौन कटाई का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था और तस्करी के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट भी उपलब्ध कराया गया।

तीन आरोपी गिरफ्तार, तीन अन्य की तलाश जारी

मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की भूमिका वन विभाग की जांच में सामने आई है।

भोजलाल नागेश, उम्र 38 वर्ष, ग्राम बरगांव, मैनपुर — मामले का मुख्य आरोपी बताया गया है। अवैध कटाई और तस्करी की साजिश में उसकी प्रमुख भूमिका रही। सर्च वारंट के दौरान उसके घर से हाथ आरा और साल चिरान बरामद किए गए। सागौन लट्ठे को नदी के भीतर छिपाया गया था।

गंगाराम विश्वकर्मा, उम्र 34 वर्ष, ग्राम बरगांव, मैनपुर — मुख्य आरोपी का सहयोगी और तस्करी की योजना में सहभागी बताया गया है। मामले में 0.95 घनमीटर सागौन लट्ठा नदी के भीतर छिपाए जाने की जानकारी सामने आई।

शोभाचन्द्र नायक, उम्र 50 वर्ष, ग्राम/तहसील सिनापाली, जिला सिनापाली, ओडिशा — अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा आरोपी है। वन विभाग के अनुसार वह पूर्व में भी वन अपराध प्रकरण में वांछित था तथा छत्तीसगढ़ के आरोपियों को सागौन कटाई का कॉन्ट्रैक्ट और लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराता था।

मामले में शामिल अन्य तीन आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की विभिन्न टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अपराध, कड़ी धाराओं में मामला

यह पूरा मामला टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से जुड़ा होने के कारण गंभीर माना जा रहा है। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं तथा भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रावधानों के तहत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 195/25 (पी.ओ.आर.) दर्ज किया गया है।

वन विभाग ने गिरफ्तार आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष प्रस्तुत किया। विभाग की ओर से आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने तथा जमानत का विरोध किए जाने का अनुरोध किया गया। न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत तीनों आरोपियों को जेल दाखिल करा दिया गया है।

मूसलाधार बारिश के बीच भी नहीं थमी निगरानी

इस कार्रवाई की सबसे अहम बात यह रही कि मानसून के दौरान मूसलाधार बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद टाइगर रिजर्व की पेट्रोलिंग टीम और स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम लगातार सक्रिय रहे।

मैदानी गश्त, घटनास्थल की वैज्ञानिक निगरानी, स्मार्ट सर्विलांस से प्राप्त इनपुट और पुलिस सहयोग के जरिए संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित किया गया। इसके बाद तकनीकी जानकारी को मैदानी पतासाजी से जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

वन विभाग की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक वन सुरक्षा तंत्र को एकीकृत कर वन अपराधों पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।

वन विभाग और पुलिस टीम की अहम भूमिका

पूरी कार्रवाई में सहायक संचालक उदंती गोपाल कश्यप, गरियाबंद पुलिस, परिक्षेत्र अधिकारी उत्तर उदंती ज्योति ध्रुव तथा परिक्षेत्र अधिकारी दक्षिण उदंती चन्द्रबली ध्रुव के नेतृत्व में दोनों परिक्षेत्रों के वन अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अभियान में वनरक्षक भूपेन्द्र कुमार भेड़िया, रोहित निषाद, योगेश दीवान, रिंकी जोशी, अनुप जांगड़े, वीरेन्द्र ध्रुव, मनोज ध्रुव, पूर्वेश निषाद, टकेश्वर देवांगन, सूर्यदेव जगतवंशी सहित अन्य वनकर्मियों ने विशेष योगदान दिया।

वन विभाग का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में भी जांच की जा रही है।

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