गरियाबंद_छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का कुल्हाड़ीघाट कभी नक्सल गतिविधियों और सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाइयों के कारण पूरे देश में चर्चित था। घने जंगलों से घिरे इस इलाके का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता था। लेकिन आज यही जंगल अपनी खूबसूरती, दुर्लभ हॉर्नबिल पक्षियों और इको-टूरिज्म के कारण नई पहचान बना रहे हैं। जिस इलाके में कभी आम लोगों का जाना मुश्किल था, वहां अब देशभर से पर्यटक और बर्ड फोटोग्राफर पहुंच रहे हैं।
2025 की बड़ी मुठभेड़ों के बाद बदली तस्वीर
जनवरी 2025 और सितंबर 2025 में कुल्हाड़ीघाट के जंगलों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई दो बड़ी मुठभेड़ों में 27 नक्सली मारे गए थे। इनमें एक-एक करोड़ रुपये के इनामी दो सीसी मेंबर भी शामिल थे। उस समय यह इलाका माओवाद का मजबूत गढ़ माना जाता था, जहां सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई चलती रही। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और यही बदलाव पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संदेश बनकर सामने आ रहा है।
उपनिदेशक वरुण जैन की पहल, शुरू हुई हॉर्नबिल सफारी
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन की पहल पर कुल्हाड़ीघाट में हॉर्नबिल सफारी शुरू की गई है। वन विभाग के अनुसार इस क्षेत्र में वर्तमान में करीब 200 से 250 हॉर्नबिल पक्षी मौजूद हैं। ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर बसे इन दुर्लभ पक्षियों को देखने और उनकी तस्वीरें कैमरे में कैद करने के लिए अब पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
दिल्ली से लेकर ओडिशा तक से पहुंच रहे प्रकृति प्रेमी
हॉर्नबिल सफारी शुरू होने के बाद कुल्हाड़ीघाट अब सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, ओडिशा और देश की राजधानी दिल्ली तक के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। बर्ड वॉचर, वन्यजीव फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी सुबह से शाम तक जंगलों में हॉर्नबिल की झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आते हैं।
सिर्फ सफारी नहीं, कयाकिंग का भी रोमांच
वन विभाग ने पर्यटकों के लिए केवल हॉर्नबिल सफारी ही नहीं, बल्कि कयाकिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियां भी शुरू की हैं। आने वाले समय में कई नई इको-टूरिज्म गतिविधियां जोड़ने की तैयारी चल रही है ताकि कुल्हाड़ीघाट प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सके।
अब बन रहा टाइगर बाड़ा, पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
कुल्हाड़ीघाट क्षेत्र में टाइगर बाड़ा तैयार करने की दिशा में भी बड़ा प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि यह योजना तय समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में कुल्हाड़ीघाट की पहचान और भी मजबूत होगी तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
नक्सलगढ़ से इको-टूरिज्म हब बनने की कहानी
वन विभाग का उद्देश्य उस इलाके को, जो कभी नक्सलवाद के कारण बदनाम था, अब प्रकृति संरक्षण और इको-टूरिज्म की नई पहचान देना है। कुल्हाड़ीघाट की बदलती तस्वीर यह साबित कर रही है कि सुरक्षा, विकास और प्राकृतिक संपदा मिलकर किसी भी क्षेत्र की किस्मत बदल सकते हैं।
बदलते गरियाबंद की सबसे खूबसूरत तस्वीर
जिस जंगल में कभी गोलियों की आवाज सुनकर लोग जाने से डरते थे, आज उसी जंगल में हॉर्नबिल की एक झलक पाने के लिए देशभर से सैलानी पहुंच रहे हैं। कुल्हाड़ीघाट अब सिर्फ एक जंगल नहीं, बल्कि बदलते गरियाबंद की नई पहचान बन चुका है। यह बदलाव बताता है कि जहां कभी भय का माहौल था, वहीं आज पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई उम्मीदें जन्म ले रही हैं।






