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बड़ी खबर: देवभोग में सड़क को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 2 जुलाई को NH-130C पर चक्का जाम की चेतावनी

100 मीटर सड़क अधूरी रहने से कीचड़ में फंसी ग्रामीणों की जिंदगी, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद_ देवभोग विकासखंड के मुडागांव के ग्रामीणों ने अधूरी सड़क निर्माण और प्रशासन की कथित अनदेखी के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) देवभोग एवं थाना प्रभारी देवभोग को ज्ञापन सौंपकर 2 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे NH-130C स्थित मुडागांव चौक पर चक्का जाम किए जाने की सूचना दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि उरमाल मुख्य मार्ग से टीपरपारा होते हुए NH-130C तक पंचायत पहुंच मार्ग का निर्माण कराया गया, लेकिन करलाकोट पारा में लगभग 100 मीटर सड़क अधूरी छोड़ दी गई। इस कारण बरसात में सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है और लोगों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है, वहीं बीमार मरीजों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ रहा है। इससे पूरे गांव में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर 22 जून 2026 को भी प्रशासन को आवेदन देकर सात दिनों के भीतर सड़क निर्माण कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई नहीं होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।

ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं थाना प्रभारी देवभोग को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यदि समय पर सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो 2 जुलाई को सुबह 9 बजे NH-130C मुडागांव चौक पर चक्का जाम किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सड़क निर्माण कराने की मांग करते हुए आंदोलन के लिए आवश्यक अनुमति भी मांगी है।

इस संबंध में हेमंत कुमार नागेश ने मीडिया से कहा कि प्रशासन को ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए। यदि जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो वे ग्रामीणों के साथ प्रस्तावित चक्का जाम आंदोलन में ग्रामीण होने के नाम से में भी शामिल हुंगा। उन्होंने कहा कि आम लोगों की परेशानी को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ग्रामीण वेणु नागेश ने मीडिया से कहा कि वे पिछले करीब 15 वर्षों से इस सड़क के निर्माण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार पहले सड़क की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक थी, लेकिन पिछले एक-दो वर्षों में यह पूरी तरह जर्जर हो गई है। उन्होंने दावा किया कि यदि कोई व्यक्ति इस भूमि पर अपना अधिकार बताता है, तो वह संबंधित राजस्व रिकॉर्ड सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा, "अगर संबंधित व्यक्ति के पास वैध रिकॉर्ड है तो वह सामने लाए। यदि रिकॉर्ड नहीं है तो यह शासकीय भूमि है और यहां सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए। सड़क बन जाने से पूरे गांव के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और बरसात में होने वाली परेशानी भी खत्म होगी।"

वहीं ग्रामीण अरविंद नागेश ने बताया कि अधूरी सड़क के कारण गांव के लोगों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "रोड नहीं बनने से ग्रामीणों को काफी दिक्कत हो रही है। यदि सड़क का निर्माण पूरा हो जाता, तो गांव के सभी लोगों को आवागमन में सुविधा मिलती। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।"

यदि 2 जुलाई को प्रस्तावित चक्का जाम होता है, तो देवभोग-ओडिशा मार्ग पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।