गरियाबंद_जिले में खरीफ सीजन से पहले प्रशासन जहां उर्वरकों की उपलब्धता, कालाबाजारी रोकने और नैनो यूरिया-डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर किसानों के बीच खाद वितरण की नई व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। प्रशासन ने किसानों को जमीन के रकबे के अनुसार चरणबद्ध तरीके से यूरिया वितरण का नियम लागू किया है, लेकिन किसानों का कहना है कि “सीमित मात्रा में खाद मिलने से समय पर खेती और बोआई प्रभावित हो सकती है।”
लेकिन गांवों में कई किसान इस व्यवस्था को लेकर असमंजस में हैं। किसानों का कहना है कि धान की बोआई के समय एक साथ पर्याप्त खाद नहीं मिलने पर फसल प्रभावित हो सकती है। कई किसानों को आशंका है कि “जरूरत के समय खाद नहीं मिला तो निजी दुकानों में महंगे दाम पर खरीदने की मजबूरी होगी।”
जिले में वर्तमान में सहकारी समितियों में हजारों मीट्रिक टन यूरिया, डीएपी, एसएसपी, एनपीके और नैनो खाद उपलब्ध होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद किसानों का सवाल है कि जब पर्याप्त भंडारण है तो फिर वितरण पर किश्तों और एकड़ आधारित सीमा क्यों लगाई जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो उर्वरकों का उपयोग फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके लिए किसानों को सही प्रशिक्षण और समय पर मार्गदर्शन जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों को अभी भी नैनो खाद के उपयोग की पूरी जानकारी नहीं है।
खरीफ सीजन की तैयारी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नई व्यवस्था किसानों की जरूरत पूरी कर पाएगी या फिर खाद के लिए किसानों को भटकना पड़ेगा।


