गरियाबंद के अमलीपदर तहसील का मामला, नामांतरण से पहले सामने आई गड़बड़ी; रजिस्ट्रार ने शुरू की जांच
गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने पड़ोसी के आधार कार्ड में कथित छेड़छाड़ कर करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि अपने नाम दर्शाकर उसकी रजिस्ट्री कर दी। मामला सामने आने के बाद राजस्व और पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
नामांतरण के दौरान सरपंच को हुआ संदेह, यहीं से खुली परतें
जानकारी के अनुसार, बजाड़ी गांव निवासी हरिसिंह नागेश के नाम से उरमाल निवासी शांति लाल जैन को लगभग एक वर्ष पहले ढाई एकड़ जमीन बेची गई थी। जब नामांतरण की प्रक्रिया के तहत गांव में इश्तहार पहुंचा, तब ग्राम सरपंच ने विक्रेता के नाम और पते पर संदेह जताया और आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया रोक दी गई। यहीं से पूरे मामले की जांच शुरू हुई और कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने कथित फर्जीवाड़े की आशंका को और मजबूत कर दिया।
50 साल पुराने रिकॉर्ड में दर्ज था दूसरे गांव के हरिसिंह का नाम
जांच में सामने आया कि जिस भूमि की बिक्री की गई, वह पिछले करीब 50 वर्षों से कैठपदर गांव निवासी हरिसिंह के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो गई। बताया जा रहा है कि रजिस्ट्री के दौरान डिजिटल फोटो किसी अन्य व्यक्ति, भंवर सिंह, का दर्ज हुआ। आरोप है कि इसी व्यक्ति ने पड़ोसी के आधार कार्ड से कथित छेड़छाड़ कर स्वयं को वास्तविक भूमि स्वामी के रूप में प्रस्तुत किया।
पत्नी के पिता के नाम पर भी रिकॉर्ड में बदलाव का आरोप
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने दस्तावेजों में कथित रूप से अपनी पत्नी के पिता का नाम दर्ज कराकर रिकॉर्ड में बदलाव करवाया। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रजिस्ट्रार ने शुरू की जांच, कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में
मामले की गंभीरता को देखते हुए देवभोग के प्रभारी रजिस्ट्रार ने जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों की पड़ताल में कथित जालसाजी से जुड़े कई बिंदु सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार अब इस मामले में संबंधित पटवारी, दस्तावेज लेखक और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आरोपी का दावा—'मैं उसी नाम से भी जाना जाता हूं'
दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए भंवर सिंह का कहना है कि वह उसी नाम (उर्फ) से भी जाना जाता है। हालांकि जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि उपलब्ध दस्तावेज और परिस्थितियां इस दावे से मेल नहीं खातीं। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल सत्यापन और आधार आधारित पहचान प्रणाली के बावजूद यदि कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री हो सकती है, तो ऐसी चूक कैसे हुई? अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।








