इष्टदेव को नवान्न अर्पित कर मांगी खुशहाली, 2 लाख से ज्यादा लोगों ने खरीदे नए वस्त्र; कपड़ा कारोबार में 20 फीसदी उछाल
गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद
देवभोग_ पश्चिम ओडिशा से लगे देवभोग और अमलीपदर तहसील क्षेत्र के करीब 200 गांवों में मंगलवार को अंचल का प्रमुख नवाखाई पर्व बड़े ही उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। ओडिशा की परंपरा से जुड़े इस पर्व में परिवार के लोग नए अन्न को सबसे पहले अपने इष्टदेव को अर्पित करते हैं और इसके बाद नवान्न ग्रहण कर सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हैं।
बताया जाता है कि देवभोग अंचल में नवाखाई पर्व मनाने की परंपरा 200 साल से भी अधिक पुरानी है। समय के साथ यह परंपरा आज भी गांव-गांव में कायम है। पर्व के अवसर पर विभिन्न वर्गों के लोग अपने परिवार के साथ एकत्र हुए और विधि-विधान से इष्टदेव की आराधना कर नवान्न का भोग लगाया। इसके बाद परिवार के छोटे-बड़े सदस्यों ने एक-दूसरे से नवाखाई का अभिवादन किया और छोटे सदस्यों ने बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
कीर्तन मंडलियों के साथ नगर भ्रमण बना आकर्षण
देवभोग नगर सहित आसपास के कई गांवों में नवाखाई के मौके पर कीर्तन मंडलियों की थाप के साथ ग्रामीणों का सामूहिक नगर भ्रमण भी देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा और उत्साह के साथ ग्रामीण एक-दूसरे को नवाखाई की शुभकामनाएं देते नजर आए। इससे पूरे अंचल में पर्व का माहौल और भी जीवंत हो गया।
चावल के आटे का अनारसा और नए वस्त्र की परंपरा
नवाखाई पर्व की तैयारी घरों की साफ-सफाई से शुरू होती है। पर्व के लिए चावल के आटे से तैयार किया जाने वाला पारंपरिक अनारसा पकवान भी घर-घर बनाया गया। इसके साथ ही परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए नए कपड़े खरीदने की परंपरा भी नवाखाई का अहम हिस्सा है।
इस परंपरा का असर बाजार में भी साफ नजर आया। देवभोग, अमलीपदर और गौहरापदर जैसे प्रमुख बाजार केंद्रों में कपड़ों की दुकानों पर दिनभर खरीदारों की भीड़ लगी रही। कारोबारियों के अनुसार इस बार करीब 2 लाख से अधिक लोगों ने नए कपड़ों की खरीदारी की।
कपड़ा कारोबार में 20 फीसदी उछाल
नवाखाई पर्व ने स्थानीय कपड़ा कारोबार को भी बड़ी रफ्तार दी है। व्यापारियों के अनुमान के मुताबिक इस बार प्रमुख करीब 10 कपड़ा दुकानों में ही 4 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार हुआ है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार कपड़ों की बिक्री में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तरह नवाखाई पर्व जहां देवभोग अंचल की सदियों पुरानी परंपरा, आस्था और पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक बना, वहीं पर्व की वजह से स्थानीय बाजार में भी जमकर रौनक देखने को मिली।




