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तीन दशक तक नक्सलियों के खौफ में रहा मटाल, पहली बार शान से फहराया तिरंगा; गोलियों की गूंज वाली पहाड़ी पर गूंजा राष्ट्रगान

AI जनरेट फोटो 
गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद_ स्वतंत्रता दिवस 2026 गरियाबंद के मटाल गांव के लिए सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि इतिहास बदलने वाला दिन बन गया। करीब तीन दशक तक नक्सलवाद के साए में रहे दुर्गम पहाड़ी गांव मटाल में आजादी के बाद पहली बार तिरंगा शान से फहराया गया। जिस पहाड़ी पर कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, उसी पहाड़ी पर शनिवार को राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत और भारत माता के जयकारों की गूंज सुनाई दी।

मैनपुर थाना क्षेत्र के कुल्हाड़ीघाट के आश्रित मटाल गांव तक पहुंचना कभी किसी चुनौती से कम नहीं था। घने जंगल और करीब चार किलोमीटर की खड़ी पहाड़ी चढ़ाई पार कर यहां पहुंचना पड़ता है। नक्सलवाद के दौर में इस इलाके में ग्रामीण भय के माहौल में जीवन गुजारते थे। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण करना भी यहां संभव नहीं था।

नक्सल मुठभेड़ के बाद बदली मटाल की तस्वीर

11 सितंबर 2025 को मटाल की पहाड़ी उस समय सुर्खियों में आई थी, जब सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मॉडेम बालकृष्ण समेत 10 नक्सलियों को मार गिराया था।

मुठभेड़ के बाद इसी पहाड़ी पर सुरक्षा बलों के जवानों ने भारत माता के जयकारे लगाए थे। उस समय यह कार्रवाई इलाके में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता के रूप में सामने आई थी।

जिस पहाड़ी पर चली थीं गोलियां, वहीं पहली बार फहराया तिरंगा

अब करीब एक साल बाद उसी मटाल की पहाड़ी ने एक और ऐतिहासिक तस्वीर देखी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुरक्षा बलों के जवान ग्रामीणों के साथ मटाल की पहाड़ी पर पहुंचे और पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

तिरंगा फहराते ही पूरा पहाड़ी इलाका राष्ट्रगान और भारत माता के जयकारों से गूंज उठा। सुरक्षा बलों के जवानों और ग्रामीणों ने एक साथ तिरंगे को सलामी दी। देशभक्ति गीतों के बीच ग्रामीणों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

ग्रामीणों के लिए तीज-त्योहार से कम नहीं था दिन

मटाल के ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का आयोजन नहीं था। वर्षों तक नक्सलवाद के डर में जीने वाले ग्रामीणों के लिए अपने गांव में पहली बार तिरंगा फहरते देखना बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण रहा।

ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ नजर आया। जिस गांव में कभी नक्सलियों का प्रभाव और भय था, वहां अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी में राष्ट्रीय पर्व मनाया गया।

डर के साए से तिरंगे की छांव तक पहुंचा मटाल

मटाल की पहाड़ी की यह तस्वीर बदलते बस्तर और गरियाबंद के नक्सल प्रभावित इलाकों में लौटती शांति की कहानी बयां करती है। कभी जिस पहाड़ी पर नक्सलियों का खौफ था, आज उसी पहाड़ी पर तिरंगा शान से लहरा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस पर मटाल में हुआ यह ध्वजारोहण ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद, सुरक्षा और बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया। सुरक्षा बलों और ग्रामीणों ने मिलकर यह संदेश दिया कि अब इस पहाड़ी पर डर नहीं, बल्कि देशभक्ति और तिरंगे की शान नजर आएगी।

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