पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, समाज की एकता और संस्कृति का दिखा भव्य संगम
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| नगर भ्रमण करते आदिवासी समाज के लोग |
देवभोग_ विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर देवभोग में आदिवासी समाज की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पूरे उत्साह और उमंग के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम में अजजा शासकीय सेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.एन. ध्रुव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता टेक चंद्र ने की। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष गरियाबंद गौरी शंकर कश्यप, टेकचंद मांझी, धनसिंह मरकाम, लोकेंद्र कोमर्रा सहित समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। देवभोग के रैली में अमलीपदर सरपंच हेमा बाई नागेश की भी कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति रही।
आर.एन. ध्रुव बोले-पहचान और संस्कृति को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी
प्रांतीय अध्यक्ष, अजजा शासकीय सेवक संघ आर.एन. ध्रुव ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस समाज के लिए अपनी संस्कृति, परंपरा, पहचान और अधिकारों को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है। आदिवासी समाज की पहचान प्रकृति, जल-जंगल-जमीन और अपनी समृद्ध परंपराओं से जुड़ी हुई है। आज जरूरत है कि समाज की नई पीढ़ी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े और अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी मजबूती से आगे लेकर चले। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट होकर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
लोकेंद्र कोमर्रा ने कहा-नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना जरूरी
लोकेंद्र कोमर्रा ने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता और समृद्ध संस्कृति है। विश्व आदिवासी दिवस हमें अपनी गौरवशाली परंपराओं को याद करने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को शिक्षा के साथ अपनी भाषा, बोली, संस्कृति और परंपराओं के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज तभी मजबूत होगा, जब हम सभी मिलकर अपनी संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के साथ शिक्षा एवं विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई रौनक
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुषों और युवाओं ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी। गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया।कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी समाज की एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक गौरव का उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
जल-जंगल-जमीन के साथ अधिकारों पर भी हुई चर्चा
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज के अधिकारों और सामाजिक विकास को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी जीवन एवं संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना होगा।
शिक्षा को बताया समाज की तरक्की की सबसे बड़ी कुंजी
कार्यक्रम में युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा और तकनीक के साथ कदम मिलाना जरूरी है, लेकिन अपनी संस्कृति और परंपरा को भूलना नहीं चाहिए। नई पीढ़ी यदि शिक्षा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहेगी, तो समाज की पहचान और विरासत आने वाले समय में भी मजबूती से कायम रहेगी।
एकता और सांस्कृतिक गौरव के साथ हुआ आयोजन का समापन
देवभोग में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस का यह कार्यक्रम आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ी को इससे जोड़ने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में उत्साह और उमंग का माहौल रहा और समाज के लोगों ने एक-दूसरे को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं। प्रमुख रूप से उपस्थित: आर.एन. ध्रुव, टेक चंद्र, गौरी शंकर कश्यप, टेक चंद मांझी, धनसिंह मरकाम, लोकेंद्र कोमर्रा एवं सरपंच हेमा बाई नागेश सहित बड़ी संख्या में समाजजन।





