गरियाबंद के धींगियामुड़ा गांव की मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर
गरियाबंद जिले के धींगियामुड़ा गांव से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 50 वर्षीय हीराबाई नेताम गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के कारण पिछले कई दिनों से गांव के बाहर एक झोपड़ी में रहने को मजबूर थी। महिला की हालत इतनी गंभीर थी कि हाथ और पैर के घावों में कीड़े पड़ चुके थे और असहनीय दर्द के बीच वह हर आने-जाने वाले से जिंदगी की भीख मांग रही थी।
अंधविश्वास के आगे हार गए रिश्ते
जानकारी के अनुसार, महिला लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। गांव में बीमारी को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैल गईं और इसे छूत का रोग मान लिया गया। ग्रामीणों के दबाव और अंधविश्वास के बीच परिजनों ने 2 जुलाई से महिला को गांव के बाहर खेत में बनी एक झोपड़ी में छोड़ दिया। परिवार केवल दो वक्त का भोजन देकर लौट जाता था।
जिला पंचायत अध्यक्ष पहुंचे, एंबुलेंस से कराया अस्पताल में भर्ती
मामले की जानकारी जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप को मिली। उन्होंने तत्काल देवभोग के बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू से संपर्क किया और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों को समझाइश देने के बाद महिला को देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
डॉक्टर बोले— यह छूत की बीमारी नहीं
चिकित्सकों के अनुसार महिला के पुराने घाव में गैंगरीन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। यह कोई संक्रामक (छूत) बीमारी नहीं है। बेहतर उपचार के लिए महिला को मेकाहारा रायपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही है।
सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला?
परिजनों का दावा है कि महिला का कई वर्षों तक निजी अस्पतालों में इलाज कराया गया, लेकिन सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं का लाभ क्यों नहीं लिया गया। यह पहलू भी जांच और चर्चा का विषय बना हुआ है।
मानवता के लिए एक बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक बीमार महिला की कहानी नहीं, बल्कि अंधविश्वास, सामाजिक उपेक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। समय रहते पहल नहीं होती तो शायद एक और जिंदगी दम तोड़ देती।










