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मौत के मोड़ पर बेखबर पीडब्ल्यूडी! गिरसुल बाजार चौक का खतरनाक गड्ढा कब लेगा किसी की जान? देवभोग-कैंटपदर मार्ग पर रोजाना गुजर रहे सैकड़ों लोग, फिर भी जिम्मेदारों की आंखें बंद

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

देवभोग_विकास और सड़क सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच देवभोग से कैंटपदर को जोड़ने वाले पीडब्ल्यूडी मार्ग की बदहाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम गिरसुल के बाजार चौक स्थित अंधे मोड़ पर सड़क की खस्ताहाल स्थिति और किनारे बने गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत और सूचना देने के बावजूद संबंधित विभाग ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है।

ग्रामीणों के अनुसार गिरसुल बाजार चौक का यह अंधा मोड़ पहले से ही दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि इतने संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर आज तक पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड, संकेतक खंभा, रिफ्लेक्टर या "आगे खतरनाक मोड़ है" जैसी सूचना तक नहीं लगाई गई है। रात के समय या तेज रफ्तार में आने वाले वाहन चालकों को अंतिम क्षण तक यह अंदाजा नहीं लग पाता कि आगे अचानक तीखा मोड़ आने वाला है।

हाल ही में बारिश के कारण सड़क किनारे की मुरम बह जाने से वहां लंबा और गहरा कटाव बन गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बड़ी गाड़ियों को पास देने के दौरान वाहन चालकों को भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है। सड़क से सटे बिजली के खंभे और दूसरी ओर बने गहरे गड्ढे के कारण जरा सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।ग्रामीणों का कहना है कि सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि मोड़ के ठीक बीच और किनारों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। वाहन चालक जैसे ही गड्ढे से बचने या साइड लेने की कोशिश करते हैं, कई बार उनका संतुलन बिगड़ जाता है। दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं, जबकि भारी वाहन और मालवाहक गाड़ियां संतुलन खोकर सीधे सड़क किनारे खेतों में उतर जा रही हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक मोड़ के जस्ट किनारे बिजली के खंभे भी लगे हुए हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है। चालक पहले गड्ढों से बचने की कोशिश करता है, फिर सामने अचानक मोड़ और बगल में खंभा आने से वाहन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। कई बार वाहन खंभे से टकराने से बचते हुए खेतों में जा गिरते हैं। मोड़ के दोनों ओर इसी प्रकार की जोखिमपूर्ण स्थिति बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इसे लगातार नजरअंदाज कर रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इसी स्थान पर पूर्व में भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार हादसों के बाद कुछ दिनों तक चर्चा होती है और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। अब लोगों में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार क्यों कर रहा है?

इस मार्ग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि लगभग 15 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण रोजाना देवभोग मुख्यालय आने-जाने के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं। छात्र-छात्राएं, किसान, व्यापारी और मरीजों सहित बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन इस रास्ते से गुजरते हैं। सुबह और शाम के समय यातायात का दबाव बढ़ने पर खतरा और भी अधिक हो जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इसी मार्ग से नियमित रूप से आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की इस गंभीर समस्या पर अब तक किसी ने प्रभावी पहल नहीं की। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्षेत्रवासियों ने पीडब्ल्यूडी विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण कर सड़क किनारे हुए कटाव की मरम्मत, गड्ढों को भरने, चेतावनी संकेतक एवं रिफ्लेक्टर लगाने तथा अंधे मोड़ पर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के लिए किसी हादसे का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जनहित और सुरक्षा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

जनता का सवाल
क्या पीडब्ल्यूडी विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा, या फिर समय रहते गिरसुल के इस खतरनाक मोड़ को सुरक्षित बनाया जाएगा?