सुशासन तिहार के अंतिम शिविर में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा पंचायत सचिव नवीना मांझी पर वसूली और मनमानी के गंभीर आरोप “साइन के लिए हफ्तों चक्कर, जन्म प्रमाण पत्र और राशन कार्ड के नाम पर 500 से 1000 रुपये तक वसूली
गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद गरियाबंद_गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड अंतर्गत चिचिया में आयोजित जिला स्तरीय सुशासन तिहार समाधान शिविर में उस समय माहौल गरमा गया, जब ग्राम पंचायत सितलीजोर के ग्रामीणों ने पंचायत सचिव श्रीमती नवीना मांझी के खिलाफ गंभीर शिकायतों का पुलिंदा प्रशासन के सामने रख दिया। देवभोग क्षेत्र के अंतिम समाधान शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने पंचायत सचिव पर वसूली, मनमानी, लापरवाही और योजनाओं में पारदर्शिता नहीं रखने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल स्थानांतरण की मांग की। ग्रामीणों ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपते हुए कहा कि पंचायत सचिव द्वारा लंबे समय से अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया जा रहा है। इसके कारण आम लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी कई दिनों तक परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्यालय की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और गरीब ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए भटक रहे हैं।
ग्रामीणों को नहीं मिलता सहयोग
ग्रामीणों ने शिकायत में बताया कि पंचायत में किसी भी कार्य के लिए जाने पर उन्हें सहयोग नहीं मिलता। आम जनता अपनी समस्या लेकर पंचायत पहुंचती है, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
पंचायत में मनमानी और नियमों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव अपनी मनमर्जी से कार्य करती हैं। पंचायत के नियमों और प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर निर्णय लिए जाते हैं, जिससे पंचायत की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
पंचायत स्टाफ और ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार का आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत सचिव पर पंचायत कर्मचारियों और आम लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि समस्या बताने पर समाधान के बजाय धौंस और रौब दिखाया जाता है।
प्रमाण पत्र और राशन कार्ड के नाम पर वसूली का आरोप
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर लगभग 1000 रुपये तक लिए जाते हैं। वहीं राशन कार्ड संबंधित कार्यों के लिए भी 500 रुपये तक की मांग की जाती है। गरीब परिवारों को जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पंच बैसाखू नागेश ने खोला मोर्चा
ग्राम पंचायत के पंच बैसाखू नागेश ने भी पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रस्ताव पारित करने के समय कई बार पंचों को बुलाया तक नहीं जाता। पंचायत के महत्वपूर्ण फैसले बिना जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और सहमति के लिए जा रहे हैं, जो पंचायत व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत में पारदर्शिता की भारी कमी है और ग्रामीणों को योजनाओं एवं पंचायत निर्णयों की सही जानकारी नहीं दी जाती।
योजनाओं की जानकारी नहीं मिलने से ग्रामीण परेशान
ग्रामवासियों का कहना है कि पंचायत स्तर पर संचालित सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर नहीं दी जाती। कई पात्र हितग्राही केवल जानकारी के अभाव में योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
प्रधानमंत्री आवास और मनरेगा को लेकर भी शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी जानकारी पंचायत स्तर पर स्पष्ट रूप से नहीं दी जाती। लोगों को यह तक नहीं पता चल पाता कि उनका नाम सूची में शामिल है या नहीं।
एक साइन के लिए लगाना पड़ता है हफ्तों चक्कर
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत सचिव के एक हस्ताक्षर के लिए भी लोगों को कई दिनों तक पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मजदूर, बुजुर्ग और गरीब परिवार इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पंचायत में अक्सर अनुपस्थित रहने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव अक्सर मुख्यालय से गायब रहती हैं। पंचायत पहुंचने पर कार्यालय बंद मिलता है या लोगों को वापस लौटा दिया जाता है। इससे पंचायत का नियमित कामकाज प्रभावित हो रहा है।
जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला पंचायत CEO से मांग की है कि पंचायत सचिव को ग्राम पंचायत सितलीजोर से तत्काल हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए, ताकि पंचायत व्यवस्था सुधर सके और लोगों को समय पर सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ मिल सके। अब देखना होगा कि सुशासन तिहार के अंतिम शिविर में उठे इस मामले पर जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और ग्रामीणों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।