गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद
देवभोग_देवभोग-धर्मगढ़ ब्राह्मण समाज के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में पहली बार सामूहिक व्रत उपनयन संस्कार का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर 6 बटुकों का विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन एवं पूर्ण विधि-विधान के साथ जनेऊ संस्कार सम्पन्न कराया गया। आयोजन में परिजनों और समाजजनों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
गायत्री महामंत्र की गूंज के बीच बटुक तापस कुमार मुंड, स्वागत अवस्थी, मानस रंजन ठाकुर, दूतिकृष्ण तिवारी, चंदन शर्मा एवं देव शर्मा ने यज्ञोपवीत धारण कर द्विजत्व जीवन में प्रवेश किया। संस्कार के दौरान प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित युवराज पांडेय ने बटुकों को उपदेश देते हुए कहा कि यज्ञोपवीत धारण करना ब्राह्मण का “दूसरा जन्म” है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, समाज, राष्ट्र और माता-पिता के प्रति कर्तव्यों के निर्वहन की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि ब्राह्मणत्व केवल जाति नहीं, बल्कि संस्कार और आचरण से जुड़ी जिम्मेदारी है। शिक्षा, दीक्षा और भिक्षा—ये तीन महान कर्तव्य यज्ञोपवीत संस्कार के साथ प्रारंभ होते हैं, जिन्हें जीवनभर निभाना ही सच्चे ब्राह्मण का धर्म है।
आयोजन में समाज प्रमुख जोगेंद्र बेहेरा, देवेंद्र बेहेरा, राजेश तिवारी, रौशन अवस्थी, सुशील अवस्थी, तुषार पटजोशी, सुरेश मुंड, हेमंत पंडा, जयंत मुंड, अजित पंडा और शांतनु मुंड सहित अनेक वरिष्ठ सामाजिक प्रतिनिधियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बटुकों को आशीर्वाद दिया।
आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए पंडित जोगेंद्र बेहेरा ने कहा कि सामूहिक संस्कार से अनावश्यक खर्च पर रोक लगती है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अनिवार्य संस्कार सम्पन्न कराने में सहयोग मिलता है। जनेऊ संस्कार में मामा की उपस्थिति को आवश्यक माना जाता है। ऐसे में एक बटुक के लिए जय विलास शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी ने मामा-मामी की भूमिका निभाकर सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश की।
आयोजकों ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग देने वाले सभी सामाजिक प्रतिनिधियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न किया।













