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देवभोग में बेकाबू हादसे,14 माह में 25 से अधिक मौतें, हालात चिंताजनक दहशत में लोग

सांकेतिक(फाइल)फोटो
गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद_देवभोग क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हो रहे हादसों ने पूरे इलाके को भय और आक्रोश के माहौल में डाल दिया है। तेज रफ्तार और लापरवाही मानो यहां आम बात हो गई है, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

14 माह में 25 से अधिक मौतें, हालात चिंताजनक

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 14 महीनों में देवभोग थाना क्षेत्र में सड़क हादसों में 25 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकांश दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई हैं। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि समस्या अब सामान्य नहीं, बल्कि बेहद गंभीर रूप ले चुकी है।

राष्ट्रीय राजमार्ग बना ‘मौत का रास्ता’

क्षेत्र से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख सड़कें इन दिनों बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं। भारी वाहन तेज गति से फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं, जबकि सड़क किनारे बसे गांवों के लोग हर पल खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं। स्कूल, बाजार और रिहायशी इलाकों के पास भी वाहनों की रफ्तार कम नहीं होती।

प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्पीड ब्रेकर,चेतावनी बोर्ड और अन्य व्यवस्थाएं,लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा। हर हादसे के बाद आश्वासन तो मिलते हैं, मगर हालात जस के तस बने रहते हैं।

ओवरलोड और बेलगाम रफ्तार बनी बड़ी वजह

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ओवरलोड ट्रकों और तेज रफ्तार वाहनों पर सख्ती नहीं होने से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। नियमों की अनदेखी और चालानी कार्रवाई की कमी के कारण वाहन चालकों में डर खत्म होता जा रहा है।

पुलिस की तत्परता, अन्य विभागों की विफलता

हादसे के बाद अक्सर पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है, यातायात बहाल करती है और आवश्यक कार्रवाई भी करती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल दुर्घटना के बाद की कार्रवाई पर्याप्त है? सड़क निर्माण, मरम्मत, संकेतक बोर्ड, स्पीड ब्रेकर और ओवरलोडिंग नियंत्रण जैसे मामलों में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है। यदि सड़क सुरक्षा से जुड़े विभाग समय पर अपनी भूमिका निभाएं, तो कई हादसों को रोका जा सकता है।

जनता की मांग: अब ठोस कदम जरूरी

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि—

दुर्घटनास्थलों पर तत्काल स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं

नियमित पुलिस पेट्रोलिंग और चालानी कार्रवाई हो

ओवरलोड वाहनों पर कड़ी निगरानी रखी जाए

संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं

सड़क सुरक्षा को लेकर सभी विभागों की संयुक्त बैठक कर ठोस कार्ययोजना बनाई जाए

आखिर कब रुकेगा खून-खराबा?

देवभोग की जनता अब जवाब चाहती है। लगातार हो रही दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि उजड़ते परिवारों की दर्दनाक कहानी हैं। यदि समय रहते ठोस और समन्वित कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। अब जरूरत केवल बयानबाजी की नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करने और सड़कों को सुरक्षित बनाने की ठोस पहल की है।