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सागौन तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर USTR का शिकंजा, फरार आरोपी जमानत के बाद फिर गिरफ्तार

ओडिशा कनेक्शन आया सामने, उदंती नदी के रास्ते सागौन खपाने की थी तैयारी; पुराने वन अपराध में भी था वांछित


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद_उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में सागौन तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी नेटवर्क से जुड़े आरोपी शोभाचंद्र नायक (50 वर्ष), निवासी सिनापाली, ओडिशा को वन विभाग की टीम ने गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि आरोपी वर्तमान वन अपराध प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया के बाद जमानत पर बाहर आया ही था कि पुराने लंबित वन अपराध प्रकरण में उसे दोबारा कब्जे में ले लिया गया।

नदी के रास्ते ओडिशा भेजने की थी तैयारी

मामला POR क्रमांक 195/25, दिनांक 22 अगस्त 2026 से जुड़ा है। उत्तर उदंती परिक्षेत्र के कुरूवाठा बीट स्थित कक्ष क्रमांक-03 में उदंती नदी किनारे गश्त के दौरान वन अमले को सागौन का ताजा कटा ठूंठ मिला था।

मौके पर सागौन का एक लट्ठा अर्जुन के पेड़ की जड़ों से रस्सी के सहारे बंधा हुआ मिला। इसके बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाते हुए स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम को सक्रिय किया।

26 अगस्त को दो संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां सागौन के लट्ठे के आसपास दिखाई दीं। तकनीकी निगरानी और मैदानी सत्यापन के बाद उनकी पहचान भोजलाल नागेश और गंगाराम विश्वकर्मा के रूप में हुई।

जांच में सामने आया कि सागौन के लट्ठे को अस्थायी बेड़ी के रूप में तैयार कर उदंती नदी के बहाव के जरिए ओडिशा ले जाने की योजना बनाई गई थी।

जांच आगे बढ़ी तो सामने आया ओडिशा कनेक्शन

मामले की जांच के दौरान वन विभाग को सागौन तस्करी के पीछे अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले। इसी दौरान सिनापाली, ओडिशा निवासी शोभाचंद्र नायक की भूमिका सामने आई।

वन विभाग के अनुसार, नायक पर छत्तीसगढ़ के आरोपियों को सागौन कटाई का काम सौंपने तथा अवैध लकड़ी को ओडिशा तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराने से जुड़ी भूमिका सामने आई। इसके बाद गरियाबंद पुलिस के तकनीकी सहयोग से उसे गिरफ्तार किया गया।

जमानत मिली तो पुराने मामले में फिर कार्रवाई

इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू आरोपी का पुराना वन अपराध प्रकरण है। शोभाचंद्र नायक POR क्रमांक 52/06, दिनांक 08 अक्टूबर 2025 में भी फरार/वांछित बताया गया था।

वर्तमान प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया के बाद जमानत पर रिहा होने के तुरंत बाद 10 सितंबर 2026 की सुबह करीब 7 बजे USTR टीम ने उसे पुराने लंबित POR में फिर से कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे माननीय देवभोग न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है।

इस कार्रवाई से वन विभाग की ओर से लंबित वन अपराध प्रकरणों में आरोपियों की स्थिति के सत्यापन और उनके खिलाफ लंबित वैधानिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया भी सामने आई है।

स्मार्ट सर्विलांस से लेकर मैदानी सूचना तंत्र तक निगरानी

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मानसून के दौरान कठिन परिस्थितियों के बावजूद वन अमले द्वारा गश्त और निगरानी जारी रखी गई। स्मार्ट सर्विलांस, मैदानी सूचना तंत्र, तकनीकी निगरानी और पुलिस समन्वय के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर जांच को आगे बढ़ाया गया।

जांच के दौरान स्थानीय स्तर पर की जा रही सागौन कटाई और उसे दूसरे राज्य तक पहुंचाने की संभावित कड़ी की जानकारी सामने आने के बाद कार्रवाई को अंतरराज्यीय नेटवर्क तक विस्तार दिया गया।

तीन आरोपी गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी

वन विभाग के अनुसार मूल प्रकरण में अब तक भोजलाल नागेश, गंगाराम विश्वकर्मा और शोभाचंद्र नायक को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं मामले से जुड़े तीन अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

चूंकि मामला टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से जुड़ा है, इसलिए आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा भारतीय वन अधिनियम, 1927 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

वन विभाग की इस कार्रवाई से सागौन तस्करी के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के साथ ही अंतरराज्यीय स्तर पर लकड़ी की तस्करी से जुड़े लोगों तक पहुंचने की दिशा में जांच आगे बढ़ती नजर आ रही है।

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