शिक्षक भीष्म कुमार सिन्हा की 'डॉट तकनीक' और 30 दिवसीय टेस्ट सीरीज़ ने बदली सैकड़ों बच्चों की तकदीर
गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 
Ai जनरेट फोटो
गरियाबंद_कहा जाता है कि यदि संकल्प मजबूत हो, मेहनत ईमानदार हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। इस बात को विकासखंड देवभोग के शासकीय उच्च प्राथमिक शाला, मगररोड़ा ने एक बार फिर सच साबित कर दिया है। राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित 'प्रयास आवासीय विद्यालय' प्रवेश परीक्षा में लगातार तीसरे वर्ष विद्यार्थियों का चयन कर विद्यालय ने सफलता की ऐतिहासिक हैट्रिक दर्ज की है।
वनांचल क्षेत्र के बच्चों के लिए शिक्षक भीष्म कुमार सिन्हा द्वारा संचालित निःशुल्क शैक्षणिक अभियान "प्रयास – एक पहल" आज उम्मीद की नई किरण बन चुका है। इस पहल ने अनेक आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य की दिशा दी है।
भव्य 'प्रयास सम्मान समारोह' में उमड़ा उत्साह
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 1 अगस्त 2026 को विद्यालय परिसर में भव्य 'प्रयास सम्मान समारोह' आयोजित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी उपस्थिति रही।
शून्य से शुरू हुआ सफर, अब बन गया सफलता का कारवां
साल 2024 में बेहद सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई यह निःशुल्क पहल आज सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
वर्ष 2024 – पहली सफलता
छात्र गिरीश नागेश का चयन हुआ और यहीं से सफलता का सिलसिला शुरू हुआ।
वर्ष 2025 – बढ़ा विश्वास
निकिता शर्मा और सुनील नागेश ने चयनित होकर साबित कर दिया कि यह सफलता संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित मेहनत का परिणाम है।
वर्ष 2026 – ऐतिहासिक हैट्रिक
इस वर्ष चंचल नागेश और शिवानी मांझी ने चयन प्राप्त कर लगातार तीसरे वर्ष सफलता का परचम लहराया और क्षेत्र के नाम ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कराई।
यूट्यूब बना दूरदराज़ के बच्चों का शिक्षक
शिक्षक भीष्म कुमार सिन्हा ने बताया कि उनकी मुहिम अब केवल मगररोड़ा स्कूल तक सीमित नहीं है। उनके YouTube चैनल – "Bhishm Kumar Sinha" तथा व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के कई जिलों के बच्चे निःशुल्क तैयारी कर रहे हैं।
इसी डिजिटल मार्गदर्शन का परिणाम है कि सक्ति जिले के पीयूष पटेल तथा अभनपुर विकासखंड की काव्या सोनवानी ने भी यूट्यूब के माध्यम से तैयारी कर 'प्रयास' परीक्षा में सफलता हासिल की।
'डॉट तकनीक' और टेस्ट सीरीज़ बनी सफलता की कुंजी
भीष्म कुमार सिन्हा द्वारा विकसित विशेष 'डॉट तकनीक', नियमित ऑनलाइन कक्षाएं और 30 दिवसीय टेस्ट सीरीज़ विद्यार्थियों की सफलता का प्रमुख आधार बन चुकी हैं। यही कारण है कि वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी अब प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
तीन वर्षों का रिकॉर्ड देख भावुक हुए अभिभावक
समारोह में मंच पर लगाए गए तीन वर्षों की सफलता दर्शाने वाले विशाल डिजिटल पोस्टरों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें देखकर जहां बच्चों के चेहरे गर्व से खिल उठे, वहीं अभिभावकों की आंखें खुशी से नम हो गईं।
अब 'मिशन 2027' की तैयारी
कार्यक्रम में मौजूद कक्षा आठवीं की छात्राएं मनीषा मांझी और मल्लिका सोनवानी सहित अन्य विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे भी कड़ी मेहनत कर वर्ष 2027 में इस सफलता को आगे बढ़ाएंगे और क्षेत्र के नाम 'सफलता का चौका' लगाएंगे।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो वनांचल के सरकारी विद्यालय भी प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों की कतार में खड़े होंगे।



