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गरियाबंद में बारिश का कहर: उफनाए नदी-नाले, कई गांवों का टूटा संपर्क; सड़कें बनीं दरिया, जनजीवन बेहाल

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज गरियाबंद

गरियाबंद_ जिले में पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार वर्षा के चलते अधिकांश नदी-नाले उफान पर हैं और कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पुल-पुलियों के ऊपर से तेज बहाव के साथ पानी बहने के कारण कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है, जबकि प्रमुख मार्गों पर आवागमन बाधित होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राजिम,फिंगेश्वर,गरियाबंद मैनपुर, देवभोग, अमलीपदर, छिन्दोला, आमामोरा, धुरसा, सहसपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का सबसे अधिक असर देखने को मिला। कई जगह लोग जान जोखिम में डालकर उफनते नदी-नालों को पार करते नजर आए।

पंटोरा में खतरे के निशान पर एनएच, कुछ घंटे और बारिश हुई तो थम सकती है आवाजाही

जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर पंटोरा स्थित गरियाबंद-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी सड़क पर पांच फीट तक पानी भर गया है। यदि अगले कुछ घंटों तक इसी तरह बारिश जारी रही तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद होने की आशंका जताई जा रही है। यह मार्ग गरियाबंद को राजधानी रायपुर से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है।

एक दर्जन से अधिक गांव बने टापू, पुल नहीं होने से बढ़ी परेशानी

बारिश का असर ग्रामीण अंचलों में और भी गंभीर है। ग्राम पंचायत छोटेगोबरा, पयलीखण्ड, साहेविनकछार, कोदोमाली, अमाड़, देवझरअमली, सिंहार और काटीपारा सहित लगभग एक दर्जन गांवों के लोग इन दिनों भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में कई नदी-नालों पर पुल नहीं होने से ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों के लिए जान जोखिम में डालकर उफनती नदियों को पैदल पार करने को मजबूर हैं।

लगातार बारिश के कारण बाघ नाला, उदंती नदी, पयलीखण्ड नदी, झापेन नदी और अमाड़ नदी उफान पर हैं। जलस्तर लगातार बढ़ने से इन गांवों का संपर्क लगभग पूरी तरह कट गया है और एक दर्जन से अधिक गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में यही स्थिति बनती है, लेकिन आज तक स्थायी पुलों का निर्माण नहीं हो सका।

खोलापारा नाले में फंसे थे 46 पर्यटक, बाइक सवार बहते-बहते बचा

मंगलवार को छिन्दोला-आमामोरा मार्ग स्थित खोलापारा नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव के कारण करीब 46 पर्यटक और राहगीर दोनों ओर फंस गए थे। इस दौरान एक मोटरसाइकिल सवार युवक नाला पार करते समय बहते-बहते बचा, जिसे स्थानीय लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाला। कई घंटों तक लोगों को पानी उतरने का इंतजार करना पड़ा।

सरगी नाला बना जानलेवा, 55 वर्षीय ग्रामीण की गई जान

लगातार बारिश के बीच सहसपुर निवासी थनवार राम यादव (55 वर्ष) धुरसा जाने के दौरान उफनते सरगी नाला को पार करने की कोशिश कर रहे थे। तेज बहाव की चपेट में आने से वे बह गए। ग्रामीणों की तलाश के बाद उनका शव खूंटेरी के पास नाले में बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया।

बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता, लोग कर रहे स्थायी समाधान की मांग

लगातार हो रही बारिश से जिले के नदी-नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यदि बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले घंटों में और भी कई मार्गों पर आवागमन पूरी तरह ठप हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन स्थानों पर हर वर्ष जलभराव और संपर्क टूटने की स्थिति बनती है, वहां स्थायी पुल और जल निकासी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। वहीं लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दल की तैनाती और सतत निगरानी की मांग की है।

बाकड़ी पैरी नदी उफान

बारिश का असर एक नजर में

24 घंटे की बारिश से जिले में बाढ़ जैसे हालात।

कई नदी-नाले उफान पर, गांवों का मुख्यालय से संपर्क प्रभावित।

पंटोरा में गरियाबंद-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

छोटेगोबरा, पयलीखण्ड, साहेविनकछार, कोदोमाली, अमाड़ सहित एक दर्जन गांव टापू में तब्दील।

पुल नहीं होने से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी-नाले पार करने को मजबूर।

छिन्दोला-आमामोरा मार्ग पर 46 पर्यटक और राहगीर फंस गए थे।

सरगी नाला पार करते समय 55 वर्षीय थनवार राम यादव की मौत।

लगातार बारिश जारी रही तो जिले के कई और मार्गों पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका।

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