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ओडिशा में USTR का बड़ा एक्शन, 3 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापा; 3 लाख की संदिग्ध इमारती लकड़ी जब्त

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद_ छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे क्षेत्र में अवैध इमारती लकड़ी के परिवहन और भंडारण के खिलाफ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने बड़ी कार्रवाई की है। 24 अगस्त को ओडिशा के नबरंगपुर जिले के रायघर वन परिक्षेत्र अंतर्गत दासपुर गांव में ओडिशा पुलिस और वन विभाग के सहयोग से संयुक्त दबिश दी गई। कार्रवाई में करीब 3 से 4 घनमीटर काष्ठ जब्त किया गया है, जिसकी विस्तृत गणना की जा रही है।

कार्रवाई के दौरान USTR टीम ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए थर्मल इमेजिंग ड्रोन से क्षेत्र की हवाई निगरानी की। ड्रोन से संदिग्ध परिसरों और लकड़ी के संभावित भंडारण स्थलों की पहचान करने के बाद लक्षित तलाशी ली गई। इसके साथ ही USTR के प्रशिक्षित कैनाइन ‘टीना’ को भी तलाशी अभियान में लगाया गया।

तीन संदिग्ध परिसरों में तलाशी

खुफिया सूचना और ड्रोन निगरानी के आधार पर तीन संदिग्ध व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली गई। इनमें कृष्ण कांत हलदर उर्फ किश्नो हलदर, अखिल सरकार और नगेन तालुकदार शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान संबंधित व्यक्तियों की अनुपस्थिति में कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस की कार्रवाई भी की गई।

पहले दो परिसरों से बड़ी मात्रा में लकड़ी बरामद हुई। हालांकि, अखिल सरकार के परिसर से मिली साल की लकड़ी के संबंध में प्रारंभिक जानकारी सामने आई है कि इसे ओडिशा क्षेत्र में विद्युत लाइन कार्य के दौरान पेड़ काटे जाने से प्राप्त किया गया था। इसकी वैधता और स्रोत का विभागीय स्तर पर सत्यापन जारी है।

वहीं, कृष्ण कांत हलदर के परिसर से मिली सागौन लकड़ी के स्रोत को लेकर भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक सूचना में यह आशंका सामने आई है कि लकड़ी रायघर वन परिक्षेत्र से आरोपितों तक पहुंचाई गई हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और दस्तावेजी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

पुराने जब्ती रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में

मामले की जांच अब केवल बरामद लकड़ी तक सीमित नहीं है। USTR ने रायघर रेंज कार्यालय से पूर्व में की गई कार्रवाई और जब्ती से जुड़े रिकॉर्ड के सत्यापन की जरूरत बताई है। POR No. 170/16 दिनांक 22 जनवरी 2025 और POR No. 01/17 दिनांक 6 अक्टूबर 2024 से जुड़े मामलों में जब्त पिकअप वाहन और सागौन लकड़ी के जब्ती मेमो समेत अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने को लेकर पूर्व में पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है।

इन रिकॉर्ड के सत्यापन से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पूर्व में जब्त लकड़ी का स्रोत क्या था, वर्तमान में वह किस स्थिति में है और उसका निस्तारण अथवा हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ।

वन अपराध दर्ज, पूरी सप्लाई चेन की जांच

कार्रवाई के बाद USTR ने POR No. 96/13 दिनांक 24 अगस्त 2026 के तहत वन एवं वन्यजीव कानूनों के अंतर्गत वन अपराध दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी है।

अब जांच का फोकस जब्त लकड़ी के स्रोत, स्वामित्व, परिवहन, भंडारण और अंतिम उपयोग पर है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

विभाग यह भी जांच करेगा कि अवैध कटाई, लकड़ी के परिवहन, भंडारण, खरीद और उसे अंतिम उपयोग तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

दासपुर-सोनपुर-रायघर बेल्ट पर पहले भी कार्रवाई

इस कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि USTR द्वारा पूर्व में दासपुर-सोनपुर-रायघर क्षेत्र में अवैध लकड़ी तस्करी से जुड़ी सूचनाओं पर कार्रवाई की जा चुकी है। दिसंबर 2023 में भी ओडिशा वन अधिकारियों के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए सागौन लकड़ी की कथित अवैध तस्करी के मामले में संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली गई थी।

लगातार सामने आ रही ऐसी सूचनाओं को देखते हुए अब विभाग अवैध कटाई से लेकर परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और अंतिम उपयोग तक पूरी सप्लाई चेन की जांच पर जोर दे रहा है।

ड्रोन से निगरानी, डॉग स्क्वाड और अंतरराज्यीय समन्वय

USTR की इस कार्रवाई में मानवीय खुफिया सूचना, अंतरराज्यीय समन्वय, थर्मल ड्रोन निगरानी, कैनाइन सहायता और लक्षित तलाशी का इस्तेमाल किया गया। विभाग का कहना है कि उद्देश्य सिर्फ लकड़ी जब्त करना नहीं, बल्कि अवैध वन अपराध से जुड़े पूरे नेटवर्क को चिन्हित करना है।

सीमा क्षेत्र में वन एवं वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए USTR ने पड़ोसी राज्यों की एजेंसियों के साथ सूचना साझा करने, संयुक्त गश्त और समन्वित कार्रवाई को आगे भी मजबूत करने की बात कही है।

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