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खेत जाते समय धनशाय नागेश पर झपटा भालुओं का झुंड, पेट-सीने और गुप्तांग में चोट; 2 किमी बाइक से लाने के बाद बरसते पानी में नदी पार कर भेजा गया अस्पताल

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद_जिले के ग्राम कामेपुर में खेत की ओर जा रहे एक ग्रामीण पर दो भालुओं ने अचानक हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके पेट, सीने और गुप्तांग में चोटें आई हैं। घायल को अस्पताल पहुंचाने के दौरान वन्यजीव के हमले के साथ-साथ गांव की बदहाल कनेक्टिविटी की तस्वीर भी सामने आई, जहां नदी पर पुल नहीं होने के कारण घायल को बरसते पानी के बीच स्ट्रेचर के सहारे नदी पार करानी पड़ी। घायल ग्रामीण की पहचान धनशाय नागेश (36 वर्ष), पिता पदमं सिंग नागेश के रूप में हुई है।

खेत जाते समय अचानक सामने आए दो भालू

जानकारी के अनुसार धनशाय नागेश खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में दो भालुओं ने अचानक उन पर हमला कर दिया। भालुओं के हमले से ग्रामीण के शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं। घटना के बाद किसी तरह ग्रामीण वहां से बचकर निकले और परिजनों व आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी।

हमले के बाद घायल की हालत को देखते हुए उसे तत्काल अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन यहां भी ग्रामीणों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी थी।

बाइक से 2 किमी तक पहुंचाया, फिर नदी बनी सबसे बड़ी बाधा

घायल धनशाय को परिजन और ग्रामीण बाइक के जरिए करीब दो किलोमीटर तक नदी के पास लेकर पहुंचे। बारिश के कारण नदी में पानी का बहाव तेज था। गांव तक 108 एंबुलेंस के पहुंचने का रास्ता नहीं होने के कारण एंबुलेंस को नदी के दूसरी ओर रोकना पड़ा।

इसके बाद घायल को 108 एंबुलेंस की स्ट्रेचर पर रखकर ग्रामीणों की मदद से नदी पार कराया गया। बरसते पानी के बीच ग्रामीणों ने घायल को संभालते हुए नदी पार कराई।इस दौरान 108 एंबुलेंस के चालक योगेश साहू और एमटी हेमंत साहू ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर घायल को सुरक्षित नदी के पार पहुंचाने में मदद की।

बारिश में सिस्टम की लाचारी आई सामने

नदी पार कराने के बाद घायल को 108 एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। इसके बाद उसे उपचार के लिए गरियाबंद अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

पूरी घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बारिश के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौती को सामने ला दिया है। वन्यजीव के हमले जैसी आपात स्थिति में मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है, लेकिन गांव के पास नदी पर पुल नहीं होने के कारण एंबुलेंस भी सीधे घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी।

पुल नहीं होने से हर बारिश में बढ़ती है परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि कामेपुर और आसपास के क्षेत्र में नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में आवागमन मुश्किल हो जाता है। नदी में पानी बढ़ने के बाद गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे में बीमारी, दुर्घटना या वन्यजीव के हमले जैसी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से नदी पर स्थायी पुल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से न सिर्फ रोजमर्रा का आवागमन आसान होगा, बल्कि आपात स्थिति में एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाएं भी सीधे गांव तक पहुंच सकेंगी। फिलहाल धनशाय नागेश का गरियाबंद अस्पताल में उपचार जारी है। घटना के बाद क्षेत्र में भालुओं की मौजूदगी को लेकर भी ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

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