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साइबर ठगी से बचाव का पाठ, घरेलू हिंसा पर खुलकर बोलने की सीख; गरियाबंद पुलिस ने छात्रों को किया जागरूक

बच्चों की सुरक्षा पर गरियाबंद पुलिस का फोकस, साइबर अपराध और गुड टच-बैड टच पर विशेष कार्यशाला

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद_बढ़ते साइबर अपराधों और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गरियाबंद पुलिस ने जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर के निर्देशन में गुरुवार को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, गरियाबंद में साइबर जागरूकता एवं महिला सुरक्षा शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भाग लिया।

साइबर ठगी से बचने के बताए आसान उपाय

गरियाबंद पुलिस की साइबर सेल टीम ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीकों से अवगत कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंक खाते की जानकारी, आधार नंबर या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया पर फोटो और निजी जानकारी सोच-समझकर साझा करें तथा किसी भी संदिग्ध लिंक, ऑनलाइन गेमिंग या लॉटरी के झांसे में न आएं।

छात्रों को यह भी बताया गया कि यदि कोई साइबर अपराध होता है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

POCSO कानून और गुड टच-बैड टच की दी जानकारी

महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने बच्चों को POCSO Act, Good Touch–Bad Touch, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और बच्चों के कानूनी अधिकारों के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी। बच्चों को किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की स्थिति में चुप न रहने और तुरंत अपने परिजनों, शिक्षकों या पुलिस को सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया।

हेल्पलाइन नंबरों की भी दी जानकारी

कार्यक्रम में आपातकालीन सेवाओं की जानकारी देते हुए 112 (इमरजेंसी), 1091 (महिला हेल्पलाइन) और 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) की उपयोगिता बताई गई, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चे और उनके परिजन तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।

एसपी बोले— जागरूक बच्चे ही सुरक्षित भविष्य की नींव

पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने कहा कि आज के डिजिटल युग में बच्चों को साइबर सुरक्षा की जानकारी देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों में जागरूकता बढ़ने से वे साइबर ठगी, ऑनलाइन अपराध और अन्य सामाजिक अपराधों से खुद को सुरक्षित रख सकेंगे। साथ ही घरेलू हिंसा और बाल अपराधों पर खुलकर चर्चा करने से बच्चों का पुलिस के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।


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