IMG-20251013-WA0049

सुशासन तिहार के मंच पर तकरार: पूर्व संसदीय सचिव और कलेक्टर के बीच तीखी नोकझोंक “ज्ञान की कमी” वाले बयान से गरमाई सियासत, मंच से ही प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

देवभोग_गरियाबंद जिले के मुंगझर में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब मंच से ही पूर्व संसदीय सचिव एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता गोवर्धन मांझी और कलेक्टर भगवान सिंह उइके के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जनसमस्याओं के निराकरण को लेकर दोनों के बीच खुलकर मतभेद सामने आए।

“सभी मामलों को न्यायालयीन बताकर बच रहे जिम्मेदारी से”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोवर्धन मांझी ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों को न्यायालयीन प्रक्रिया बताकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने रायपुर जिले के पूर्व कलेक्टर एम.के. राउत का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रशासन में कसावट और त्वरित निर्णय लेने की जरूरत है मांझी ने मंच से ही अधिकारियों को समय पर शिविर में पहुंचकर जनता की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की नसीहत दी।

कलेक्टर बोले – “ज्ञान की कमी है”

मंच से लगाए गए आरोपों पर जवाब देते हुए कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा कि पूर्व संसदीय सचिव को प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं है ।

कलेक्टर के इस बयान के बाद कार्यक्रम का माहौल और गरमा गया। जवाब में गोवर्धन मांझी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अगर कलेक्टर में ज्ञान होता तो वे समय पर शिविर में पहुंचते।”

समय पर पहुंचने को लेकर छिड़ी नई बहस

दोनों के बीच हुई बयानबाजी के बाद पूरे कार्यक्रम में समय पर उपस्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा होती रही कि जनसमस्याओं के समाधान में आखिर किसकी जिम्मेदारी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

आने वाले शिविरों पर टिकी नजरें

सुशासन तिहार के मंच से सामने आई इस बहस ने अब जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। अब लोगों की नजर आने वाले समाधान शिविरों पर टिकी है कि आखिर कौन समय पर पहुंचकर जनता के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाता है।