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बेटी होने के बाद बदला व्यवहार? अपने ही बच्चों को नाम दिलाने के लिए प्रशासन के दरवाजे पहुंची मां सुशासन तिहार में महिला की पीड़ा ने समाज की सोच पर खड़े किए सवाल...

 

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

देवभोग_ सुशासन तिहार 2026 के तहत माडागांव में आयोजित समाधान शिविर में एक महिला की शिकायत ने लोगों को भावुक कर दिया। देवभोग विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत निष्ठीगुड़ा के आश्रित ग्राम फुलीमुड़ा निवासी खुशबू कश्यप पति ईश्वर लाल कश्यप ने प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए बच्चों के अधिकार और सम्मान के लिए गुहार लगाई।

महिला ने आवेदन में आरोप लगाया है कि उसके पति ईश्वर लाल कश्यप अपने ही बच्चों को अपना नाम देने से इंकार कर रहे हैं। इस बात को लेकर घर में लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है। महिला का कहना है कि जब वह बच्चों के अधिकार और पहचान की बात करती है तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है डराया-धमकाया और तलाक देने तक की धमकी दी जाती है।

“एक मां बच्चों की पहचान के लिए लड़ रही लड़ाई”

महिला ने आवेदन में बताया कि वह केवल चाहती है कि उसके बच्चों को उनका अधिकार और पहचान मिले, ताकि भविष्य में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि एक मां को अपने ही बच्चों को पिता का नाम दिलाने के लिए प्रशासन के दरवाजे तक पहुंचना पड़ा।

“अपने ही बच्चों को नाम देने से पीछे हटना दुर्भाग्यपूर्ण”

शिविर में मौजूद लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। कई लोगों ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक पिता अपने ही बच्चों को अपना नाम देने से पीछे हट रहा है। लोगों का मानना है कि यह केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि समाज में आज भी मौजूद उस सोच को दर्शाता है, जहां महिलाओं और बेटियों को बराबरी का अधिकार देने में हिचक दिखाई देती है।

बेटी होने के बाद बदला व्यवहार?

महिला ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि बेटी जन्म लेने के बाद परिवार का व्यवहार बदल गया। उसे लगातार अपमानित महसूस कराया जाता है, जिससे वह मानसिक तनाव में जी रही है।

सुशासन तिहार में पहुंची यह शिकायत अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। महिला ने प्रशासन से न्याय, सुरक्षा और बच्चों के अधिकार सुनिश्चित कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।