देवभोग_गरियाबंद जिले के नगर पंचायत देवभोग क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत लगभग 25 आवास विभागीय लापरवाही और अंदरूनी खींचतान की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। हितग्राहियों के घरों की जियो टैगिंग से लेकर कॉलम हेतु खुदाई तक का काम पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक प्रथम किस्त जारी नहीं होने से निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है।
जानकारी के अनुसार स्वीकृत 25 आवासों में से 18 हितग्राहियों की जियो टैगिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद प्रथम किस्त जारी करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत में इंजीनियर और बाबू स्तर पर फाइलों की खींचतान के कारण गरीब परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि प्रथम किस्त जारी करने के लिए आवश्यक पत्राचार समय पर उच्च कार्यालय को नहीं भेजा गया, जिससे पूरी प्रक्रिया अटक गई है।
इधर बरसात नजदीक आने से हितग्राहियों की चिंता बढ़ गई है। कई परिवारों ने नए मकान की उम्मीद में पुराने कच्चे घर तोड़ दिए और निर्माण के लिए गड्ढे खुदवा दिए, लेकिन राशि नहीं मिलने से काम अधूरा पड़ा हुआ है। अब आशंका जताई जा रही है कि बारिश शुरू होते ही ये गड्ढे पानी से भर जाएंगे और निर्माण कार्य और अधिक प्रभावित होगा।
हितग्राहियों का कहना है कि यदि समय पर पहली किस्त मिल जाती तो वे कम से कम कॉलम और बीम का कार्य पूरा कर अपने परिवार को बारिश से बचाने की तैयारी कर लेते। अब स्थिति यह है कि न नया मकान बन पा रहा है और न ही पुराने घर रहने लायक बचे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह भी है कि शासन द्वारा 18 महीने के भीतर आवास पूर्ण करने पर मिलने वाली लगभग 32 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और गृह प्रवेश लाभ से भी हितग्राही वंचित हो सकते हैं। निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारण तय समय सीमा में मकान पूरा करना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
गरीब परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि विभागीय ढिलाई पर तत्काल कार्रवाई करते हुए लंबित प्रथम किस्त जारी की जाए, ताकि बरसात से पहले निर्माण कार्य शुरू हो सके और गरीबों का पक्का घर पाने का सपना अधूरा न रह जाए।
सीएमओ ने क्या कहा
जब इस मामले में नगर पंचायत देवभोग के सीएमओ दुष्यंत साहू से दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि नगर पंचायत में 25 आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 18 हितग्राहियों की जियो टैगिंग पूरी हो चुकी है। पहले हितग्राहियों को चेक के माध्यम से राशि दी जाती थी, लेकिन अब नियमों में बदलाव के बाद राशि सीधे हितग्राही के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाती है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है तथा बरसात से पहले निर्माण कार्य प्रारंभ कराने का प्रयास किया जा रहा है।










