गजानंद कश्यप, छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क, गरियाबंद
देवभोग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आवास आवंटन की अनियमितताओं पर जांच टीम तो गठित कर दी गई, लेकिन जांच की रफ्तार बेहद धीमी है। आदेश जारी हुए एक सप्ताह से अधिक बीत चुके हैं, फिर भी ना कोई तथ्यात्मक रिपोर्ट सामने आई है और ना ही कोई मौके पर जांच शुरू हुई है। इस निष्क्रियता से ग्रामीणों में नाराज़गी है और अब लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है — “जब जांच का आदेश सिर्फ कागजों में रह जाए, तो पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जाए?”
मीडिया रिपोर्ट का असर, पर प्रशासन की चुप्पी“छत्तीसगढ़ न्यूज” वेब पोर्टल और “प्रकाश गंगा” पेपर द्वारा इस घोटाले को उजागर करने के बाद SDM देवभोग ने तहसीलदार और लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता को जांच के आदेश जारी किए थे। पत्र क्रमांक 1505/अभि/वा-1/2025 दिनांक 06.11.2025 के अनुसार, 3 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे — लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि “प्रशासन ने केवल औपचारिकता निभाई, हकीकत में कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
जांच टीम की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार—
1. जांच अधिकारी अब तक कॉलोनी का दौरा तक नहीं कर पाए।
2. न किसी कर्मचारी से पूछताछ हुई, न कोई रूम निरीक्षण।
3. आवास आवंटन के रिकॉर्ड अब भी बिना जांच के जस के तस रखे हैं।
लोगों का कहना है कि “अगर यही गति रही, तो दोषियों को संरक्षण मिलेगा और भ्रष्टाचार पर पर्दा पड़ जाएगा।”
क्या हैं गंभीर अनियमितताएँ
1 पति-पत्नी को अलग-अलग आवास आवंटित।
2 बिना आदेश के पटवारी को रूम दिया गया।
3 मुख्यालय से बाहर के शिक्षकों व सचिवों को कमरे दिए गए।
4 ट्रांसफर हो चुके कर्मचारी अब भी रूम कब्जे में रखे हुए हैं।
5 स्थानीयों को प्राथमिकता दिया गया है। ये सभी तथ्य हाउसिंग बोर्ड के नियमों का खुला उल्लंघन दर्शाते हैं।
ग्रामीणों की मांग — तत्काल जांच शुरू हो
ग्रामवासियों और समाजसेवियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि_
1.जांच टीम को तुरंत मौके पर भेजा जाए।
2.रिपोर्ट को सार्वजनिक किप एमबीया जाए,और दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
आवेदक ने भी कहा — “प्रशासन को जांच का आदेश देने के बाद अब कार्रवाई से पीछे नहीं हटना चाहिए। जनता उम्मीद कर रही है कि पारदर्शिता की कसौटी पर यह मामला खरा उतरे।”
छत्तीसगढ़ न्यूज की अपील
“छत्तीसगढ़ न्यूज प्रशासन से अपील करता है कि देवभोग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के अनियमित आवंटन की जांच में पारदर्शिता रखी जाए और दोषियों पर शीघ्र सख्त कार्रवाई की जाए।”
अब निगाहें रिपोर्ट पर
देवभोग हाउसिंग बोर्ड का यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। सवाल यह है कि जब आदेश जारी होने के बाद भी कार्रवाई न हो — तो क्या जांच सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह जाएगी?











