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जर्जर सड़क से जूझते ग्रामीण, 2 किमी रास्ते ने छीनी रफ्तार- “गांव चलों बस्ती चलों” में फूटा आक्रोश

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

देवभोग _ग्राम पंचायत डूमरबहाल से केन्दुवन पहुंच मार्ग की करीब 2 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क वर्षों से बदहाली का दंश झेल रही है। यह सड़क अब विकास नहीं, बल्कि उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है। गड्ढों और धूल-कीचड़ से भरे इस रास्ते ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है।

बारिश में बन जाता है दलदल, थम जाती है जिंदगी

बरसात के मौसम में यह मार्ग पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाता है। हालात ऐसे बन जाते हैं कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है, वाहन तो दूर की बात है। कई बार लोग बीच रास्ते में फंस जाते हैं और घंटों जूझते रहते हैं।

बच्चों, मरीजों और किसानों पर सबसे ज्यादा असर

इस रास्ते से रोजाना स्कूली बच्चे, मरीज, किसान और मजदूर गुजरते हैं। खराब सड़क के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं आपातकाल में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। एंबुलेंस तक गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

गांव चलों बस्ती चलों” में गूंजी ग्रामीणों की आवाज

11 अप्रैल को आयोजित “गांव चलों बस्ती चलों” अभियान के जनसंवाद कार्यक्रम में ग्रामीणों ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। लोगों ने साफ कहा—अब सिर्फ वादे नहीं, पक्की सड़क चाहिए।

बघेल का आश्वासन: “सुशासन तिहार” से पहले उठेगा मुद्दा

कार्यक्रम के प्रभारी चवन लाल बघेल ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह मांग वर्षों से लंबित है। उन्होंने आश्वासन दिया कि “सुशासन तिहार” से पहले इस समस्या को शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से रखा जाएगा और डूमरबहाल से केन्दुवन मार्ग के लिए 2 किमी पक्की सड़क की स्वीकृति दिलाने हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

अब सवाल-क्या मिलेगा समाधान या फिर मिलेगा सिर्फ आश्वासन?

ग्रामीणों की उम्मीदें फिर एक बार जागी हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार सड़क हकीकत बनेगी या फिर यह मुद्दा भी कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा।