गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद
गरियाबंद_ देवभोग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आवास आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अब इस मामले में प्रशासन हरकत में आ गया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) देवभोग द्वारा जारी पत्र क्रमांक 1505/अभि/वा-1/2025 दिनांक 06.11.2025 के माध्यम से जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पत्र में तहसीलदार देवभोग एवं लोक निर्माण विभाग (भवन संधारण) के उप अभियंता को जांच कर 3 दिवस के भीतर तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मीडिया की रिपोर्टिंग का बड़ा असर
इस पूरे मामले को सबसे पहले “छत्तीसगढ़ न्यूज़” वेब पोर्टल और “प्रकाश गंगा” पेपर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार के प्रकाशन के बाद प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित कर दी। यह मीडिया की सार्थक और प्रभावशाली पत्रकारिता का परिणाम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
देवभोग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में सरकारी रूमों के आवंटन में कई गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार_
पति-पत्नी को अलग-अलग रूम आवंटित किए गए हैं।
पटवारी को बिना आदेश के रूम दिया गया है।
पंचायत सचिव और शिक्षक को मुख्यालय से बाहर आवास आवंटित हैं।
ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों के नाम पर अब भी रूम आवंटन जारी है।
यह सभी उदाहरण प्रशासनिक नियमों के स्पष्ट उल्लंघन को दर्शाते हैं।
हाउसिंग बोर्ड के नियम क्या कहते हैं
1️⃣ एक ही परिवार को दो आवास देना नियमविरुद्ध है।
2️⃣ केवल पात्र आवेदकों को ही आवास का अधिकार है।
3️⃣ मुख्यालय से बाहर के कर्मचारियों को आवास देना अवैध है।
4️⃣ बिना सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति कोई आवंटन वैध नहीं माना जाएगा।
शिकायत और प्रशासन की कार्रवाई
ग्रामीणों एवं समाजसेवियों ने हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में जारी आवास अनियमितताओं को लेकर लिखित शिकायतें प्रस्तुत की थीं। इसी के आधार पर आवेदक गजानंद कश्यप, निवासी गिरसूूल द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर SDM देवभोग ने कार्रवाई करते हुए जांच के निर्देश जारी किए हैं।
SDM को जांच के निर्देश
देवभोग हाउसिंग बोर्ड में अनियमित आवंटन के संबंध में जानकारी मिली है। SDM को जांच के निर्देश दिए गए हैं। 3 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, उसके बाद आवश्यक कार्यवाही होगी।”
संभावित कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद _
पात्रता से बाहर रूम प्राप्त करने वालों की सूची सार्वजनिक की जाएगी।
ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों से कमरे खाली कराए जाएंगे।
संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है।
पारदर्शिता की परीक्षा
देवभोग हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का यह मामला अब पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। जिलेभर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि तीन दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट से कितना सच सामने आता है और प्रशासन उस पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।











