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पुष्पा मूवी जैसी सागौन तस्करी का पर्दाफाश! उड़ीसा के “पुष्पा गैंग” के तीन तस्कर गिरफ्तार

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद_उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व में बीते दिन वन विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सागौन लकड़ी की तस्करी करने वाले उड़ीसा के पुष्पा गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी बिल्कुल पुष्पा मूवी की तरह नदी के बहाव और मोटरसाइकिल के ज़रिए सागौन लठ्ठों की अवैध ढुलाई करते थे।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में ऑपरेशन “पुष्पा गैंग” सफल

इस कार्रवाई को श्री शशिगानंदन के. (भा.व.से.), उपनिदेशक, उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व गरियाबंद एवं श्री वरुण जैन (भा.व.से.) के कुशल मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। दक्षिण उदंती वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री चन्द्रबली ध्रुव, वनरक्षक श्री सूर्यदेव जगतवंशी, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी श्री मनोज कुमार ध्रुव (कोयबा) और उनकी टीम ने 10 नवंबर 2025 को यह कार्रवाई की।

नदी के सहारे सागौन तस्करी – पुष्पा स्टाइल में अपराध

आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व के जंगलों से सागौन वृक्ष काटकर लकड़ी के लठ्ठे बनाते और उन्हें उदंती नदी के पानी के माध्यम से बहाकर और मोटरसाइकिल से ढोकर उड़ीसा ले जाते थे। उन्होंने पहले भी उत्तर और दक्षिण उदंती क्षेत्र में कई बार अवैध कटाई और तस्करी करने की बात कबूल की।

तीन आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार

वन विभाग की टीम ने उड़ीसा राज्य के ग्राम सेन्दुरसील, थाना सीनापाली (जिला नुआपाड़ा) के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है_तोसूधर हंस पिता सेबा हंस (45 वर्ष),संतोष हंस पिता ईश्वर हंस (31 वर्ष),ओमकार हंस पिता बिनोद हंस (28 वर्ष) वहीं गैंग के तीन सदस्य — विधा, लक्ष्मी और शोभा (ग्राम घुचागुड़ा, थाना सीनापाली, उड़ीसा) अब भी फरार हैं। उनकी पतासाजी जारी है।

कानूनी कार्रवाई

सहायक परिक्षेत्र अधिकारी श्री मनोज कुमार ध्रुव के द्वारा सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 27, 29, 31, 50, 51, 52 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 (1) क, ड, च के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें माननीय न्यायालय देवभोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया। वन अमले की टीम को बधाई

इस सफल कार्रवाई में

श्री चन्द्रबली ध्रुव, श्री धर्मेन्द्र सोनवानी, श्री मनोज कुमार ध्रुव,अनुप जांगड़े, विरेन्द्र कुमार ध्रुव, नीलकंठ ध्रुव,सूर्यदेव जगतवंशी एवं पेट्रोलिंग श्रमिकों का विशेष योगदान रहा।