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गरियाबंद के जंगलों में मिली चीन में दर्ज दुर्लभ मकड़ी, भारत में पहली बार हुई पहचान

छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में वैज्ञानिक खोज, ‘Mangora baii’ की मौजूदगी से जैव-विविधता पर शोध को मिली नई दिशा


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क, छत्तीसगढ़

गरियाबंद_ छत्तीसगढ़ के गरियाबंद वन क्षेत्र से जैव-विविधता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी सामने आई है। यहां मकड़ियों की जैव-विविधता पर अध्ययन कर रहे शोधकर्ताओं ने Mangora baii Mi & Li, 2021 प्रजाति की मकड़ी को पहली बार भारत में दर्ज किया है। इससे पहले इस प्रजाति का रिकॉर्ड चीन में मिला था। इस खोज से गरियाबंद के जंगलों में मौजूद जैव-विविधता के वैज्ञानिक महत्व को नई पहचान मिली है।

वैज्ञानिक शोध पत्र में प्रकाशित हुई खोज_

शोधकर्ताओं के अनुसार, गरियाबंद वन क्षेत्र से प्राप्त मादा मकड़ी के नमूने का विस्तृत अध्ययन किया गया। इसकी शारीरिक संरचना और विशिष्ट पहचान संबंधी विशेषताओं के आधार पर इसे Mangora baii प्रजाति के रूप में पहचाना गया। इस शोध को Indian Journal of Natural Sciences में प्रकाशित किया गया है।

इस शोध दल में डॉ. अविनाश आर. निचत, एम. वी. वी. शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भखारा, धमतरी; डॉ. के. के. हैरिस एवं जशवंत नायक, शासकीय दूधाधारी बजरंग गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, रायपुर; तथा हितेश कुमार वारते, श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर शामिल हैं।

शारीरिक बनावट से हुई प्रजाति की पहचान_

शोधकर्ताओं ने मकड़ी की पहचान के लिए उसकी शारीरिक संरचना का अध्ययन किया। इसके अंडाकार उदर पर चौड़ी अनुप्रस्थ काली धारियां, काला सेफलोथोरैक्स, पैरों की चौथी जोड़ी की लंबाई और उदर के निचले हिस्से में मौजूद चौड़ी अनुदैर्ध्य रेखा इसकी प्रमुख पहचान विशेषताओं में शामिल हैं।

पारिस्थितिकी संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं मकड़ियां_

मकड़ियां प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये विभिन्न कीटों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करती हैं और खाद्य शृंखला के संतुलन को बनाए रखने में योगदान देती हैं। ऐसे में किसी प्रजाति का नए भौगोलिक क्षेत्र में दर्ज होना उसके वितरण और संबंधित क्षेत्र की जैव-विविधता को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

गरियाबंद के जंगलों में आगे भी नई खोजों की संभावना_

गरियाबंद से Mangora baii का भारत में पहला रिकॉर्ड यह संकेत देता है कि छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में जैव-विविधता के कई ऐसे पहलू हो सकते हैं, जिनका अभी विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन होना बाकी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, राज्य के अलग-अलग वन क्षेत्रों में लगातार सर्वेक्षण किए जाने से मकड़ियों सहित अन्य जीवों की प्रजातियों और उनके भौगोलिक वितरण से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

यह खोज छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में जैव-विविधता के अध्ययन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत में मकड़ियों के वितरण संबंधी वैज्ञानिक जानकारी में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

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