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शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने देवभोग में हुई समीक्षा बैठक, जिला शिक्षा अधिकारी ने दिया मार्गदर्शन

बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति से लेकर स्मार्ट क्लास, नियमित अध्यापन और परीक्षा परिणाम सुधारने पर जोर: बीईओ लीलांबर कश्यप सहित प्राचार्य एवं संकुल समन्वयक रहे मौजूद


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ 

देवभोग_ विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से 22 अक्टूबर 2026 को विकासखंड देवभोग के समस्त हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों तथा संकुल समन्वयकों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बीआरसीसी (B.R.C.C.) कार्यालय के प्रशिक्षण कक्ष में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने की। बैठक में विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलांबर कश्यप सहित समस्त प्राचार्य एवं संकुल समन्वयक उपस्थित रहे।

बैठक का शुभारंभ जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर के स्वागत के साथ हुआ। विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलांबर कश्यप, विद्यालयों के प्राचार्यों एवं संकुल समन्वयकों ने उनका स्वागत किया। इसके पश्चात शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा, परिचर्चा और समीक्षा की गई।

बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर_

बैठक में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास करने पर जोर दिया गया। अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के पालकों से तत्काल संपर्क कर उनकी अनुपस्थिति के कारणों की जानकारी लेने और बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई। साथ ही विद्यालयों का वातावरण रोचक, आकर्षक एवं भयमुक्त बनाने पर जोर दिया गया, ताकि विद्यार्थी सहजता के साथ पढ़ाई कर सकें और विद्यालय के प्रति उनकी रुचि बढ़े।

नियमित अध्यापन और शैक्षणिक उपलब्धि बढ़ाने पर चर्चा_

विद्यार्थियों की रीडिंग एवं राइटिंग स्किल (पठन एवं लेखन कौशल) विकसित करने के लिए प्रतिदिन अभ्यास कराने तथा उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार लाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। नियमित अध्यापन सुनिश्चित करने, शिक्षक की अनुपस्थिति या अवकाश की स्थिति में कक्षाओं को खाली न छोड़ते हुए वैकल्पिक व्यवस्था से कक्षा संचालन करने तथा विषयवार व्याख्याता उपलब्ध नहीं होने पर स्नातक शिक्षकों की योग्यता के अनुरूप अध्यापन व्यवस्था करने पर चर्चा की गई।

विद्यालयों में निर्धारित टाइम टेबल एवं शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सभी गतिविधियों का संचालन करने के निर्देशों पर भी जोर दिया गया। मासिक टेस्ट, यूनिट टेस्ट एवं त्रैमासिक परीक्षा के परिणामों का विश्लेषण कर विद्यार्थियों की कमजोरियों को पहचानने और उनके लिए उपचारात्मक शिक्षण (रिमेडियल टीचिंग) की व्यवस्था करने की आवश्यकता बताई गई।

शिक्षकों की तैयारी और आधुनिक शिक्षण पद्धति पर बल_

बैठक में शिक्षकों को पूरी तैयारी के साथ कक्षा में जाने तथा डीएड एवं बीएड प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए शिक्षण कौशल का उपयोग करते हुए अध्यापन करने पर जोर दिया गया। कक्षा में शिक्षक एवं विद्यार्थियों के बीच बेहतर संवाद और सहभागिता (इंटरैक्शन) बढ़ाने, आवश्यकता के अनुसार विद्यार्थियों की काउंसलिंग करने तथा विभिन्न विभागीय प्रशिक्षणों में प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का कक्षा-कक्ष में व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।

VSK, UDISE और छात्रवृत्ति सहित विभागीय एंट्री समय पर पूरी करने पर जोर_

शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए VSK में अनिवार्य उपस्थिति, UDISE में आवश्यक प्रविष्टियां, छात्रवृत्ति एंट्री, e-HRMS एंट्री सहित समस्त विभागीय ऑनलाइन प्रविष्टियों को समय पर और पूर्णता के साथ करने की महत्ता बताई गई। संबंधित अभिलेखों एवं जानकारियों को अद्यतन रखने पर भी जोर दिया गया।

स्मार्ट क्लास, लैब और लाइब्रेरी का नियमित उपयोग_

विद्यालयों में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला (लैब) एवं पुस्तकालय (लाइब्रेरी) का नियमित संचालन करने पर चर्चा की गई। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों (को-करीकुलर एक्टिविटीज) के माध्यम से बच्चों के कौशल विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक, नैतिक एवं व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

स्वच्छ विद्यालय, पालक बैठक और शैक्षणिक नवाचार पर चर्चा_

विद्यालय परिसर की स्वच्छता बनाए रखने, परिसर में हरियाली बढ़ाने तथा सकारात्मक एवं सामंजस्यपूर्ण वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया। विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की नियमित बैठकें आयोजित करने, पालकों के साथ बैठक कर बच्चों की पढ़ाई एवं उपस्थिति की स्थिति पर चर्चा करने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नए शैक्षणिक नवाचार अपनाने की आवश्यकता बताई गई।

इसके साथ ही शासन की विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं का बेहतर संचालन, विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि का व्यवस्थित अभिलेख संधारण तथा शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों की नियमित निगरानी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा एवं समीक्षा की गई।

जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए कही यह बात_

शिक्षकों को पूरी तैयारी के साथ अध्यापन करने, कक्षा में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने और विभागीय प्रशिक्षणों का उपयोग शिक्षण कार्य में करने पर जोर दिया। उन्होंने VSK में अनिवार्य उपस्थिति, UDISE, छात्रवृत्ति एवं e-HRMS सहित सभी विभागीय प्रविष्टियां समय पर पूर्ण करने तथा स्मार्ट क्लास, लैब और लाइब्रेरी का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।

बीईओ लीलांबर कश्यप ने कही यह बात_

विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलांबर कश्यप ने जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायक सुझावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शासन की योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्राचार्यों एवं संकुल समन्वयकों के समन्वय से निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बैठक में उपस्थित प्राचार्यों एवं संकुल समन्वयकों ने भी विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार लाने, विद्यालयों में बेहतर वातावरण तैयार करने और सभी शैक्षणिक एवं विभागीय गतिविधियों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।


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