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128 गांवों की महाग्रामसभा में गूंजा आदिवासी अधिकारों का मुद्दा, विधायक जनक ध्रुव और अंबिका मरकाम ने दी आंदोलन की चेतावनी

नाइट कर्फ्यू, विस्थापन, विद्युतीकरण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर हजारों ग्रामीणों ने उठाई आवाज; 60 दिनों में मांगों पर कार्रवाई का प्रस्ताव


गजानन्द कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

मैनपुर_ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में नाइट कर्फ्यू, विस्थापन, विद्युतीकरण और मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राजापड़ाव-गौरगांव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में शनिवार को जल, जंगल, जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले महाग्रामसभा का आयोजन किया गया। इसमें गरियाबंद और धमतरी जिले के 128 गांवों से हजारों की संख्या में महिला-पुरुष, जनप्रतिनिधि और सामाजिक मुखिया शामिल हुए। सभा में बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव और सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने आदिवासियों के अधिकारों, विस्थापन और आवागमन पर प्रतिबंधों को लेकर अपनी बात रखी।

जल, जंगल, जमीन से आदिवासियों की पहचान विधानसभा से न्यायपालिका तक लड़ाई की बात_

महाग्रामसभा में बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि आदिवासी समाज पीढ़ियों से जंगलों में निवास करता आया है। जंगल उनके जीवन, संस्कृति, परंपरा और आजीविका का आधार है। ऐसे में उन्हें जंगल से अलग करने के बजाय पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

विधायक ध्रुव ने कहा कि शाम 6 से 7 बजे के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाका लगाए जाने से क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है। विशेषकर रात के समय मरीजों को अस्पताल ले जाने और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर वे पहले भी विधानसभा में आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी ग्रामीणों के अधिकारों की बात प्रमुखता से रखेंगे। आगामी विधानसभा सत्र में इन मुद्दों को उठाने की बात कहते हुए उन्होंने आदिवासी समाज के हक और अधिकारों के लिए सड़क से लेकर न्यायपालिका तक संघर्ष करने की प्रतिबद्धता जताई।

अंबिका मरकाम ने विस्थापन के प्रयासों पर उठाए सवाल_

सिहावा विधायक अंबिका मरकाम ने कहा कि क्षेत्र के आदिवासी परिवार पीढ़ियों से जंगलों में निवास करते आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल, जमीन और वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उन्हें उनके पारंपरिक निवास से बेदखल करने के प्रयासों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और उनकी समस्याओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। मरकाम ने ग्रामीणों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन और आपसी एकता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता उनका परिवार है और जनता के साथ होने वाले अन्याय के मुद्दों पर वे उनके साथ खड़ी रहेंगी। उन्होंने ग्रामीणों से आपसी मतभेदों से दूर रहकर अपनी मांगों को संगठित तरीके से उठाने की अपील की।

60 दिनों में मांगों पर कार्रवाई की मांग_

महाग्रामसभा की अध्यक्षता हिम्मत सिंह नेताम ने की। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद जल, जंगल, जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम ने ग्रामसभा में पारित प्रस्तावों को पढ़कर सुनाया।

समिति की ओर से संबंधित मांगों और संकल्पों को विधानसभा, लोकसभा तथा जिला एवं जनपद स्तर पर उठाकर शासन से उनके अनुपालन की मांग की गई। इसके लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय किए जाने की बात कही गई। समिति ने कहा कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में पेसा अधिनियम के तहत ग्रामसभा के असहयोग संबंधी कदम पर विचार किया जाएगा। प्रस्ताव के क्रियान्वयन और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग_

सभा में शामिल आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को सामने रखा। वक्ताओं ने कहा कि कई गांवों में अब भी बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है। स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवागमन की समस्याओं को लेकर ग्रामीण लंबे समय से अपनी मांगें उठाते आ रहे हैं।

प्रतिनिधियों ने वनग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने, विस्थापन के दबाव से राहत दिलाने और स्थानीय निवासियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए उनके अधिकारों और जरूरतों का समाधान किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने नाइट कर्फ्यू और राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगाए जाने वाले नाकों से होने वाली परेशानियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि नियमों और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मरीजों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की आवश्यक आवाजाही का भी उचित प्रबंध किया जाए।

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में रखी गईं समस्याएं_

महाग्रामसभा में बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, सिहावा विधायक अंबिका मरकाम के साथ एसडीएम नेहा भेड़िया और नायब तहसीलदार भी पहुंचे। सभा में क्षेत्र के सामाजिक मुखियाओं, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ आदिवासी नेताओं ने अपनी बात रखी।

इस दौरान मनोज साक्षी, अर्जुन नायक, टीकम नागवंशी, महेंद्र नेताम, पूरन मेश्राम, दैनिक राम मंडावी सहित अन्य वक्ताओं ने ग्रामीणों की समस्याओं और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया।

कार्यक्रम में जल, जंगल, जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम, महासचिव रेवा देवदास, सचिव माखन सलाम सहित समिति के पदाधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि और 128 गांवों के हजारों ग्रामीण मौजूद रहे। महाग्रामसभा का संचालन पूरन मेश्राम ने किया। आयोजन सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चला।

अब शासन-प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें_

कोकड़ी में आयोजित महाग्रामसभा के जरिए ग्रामीणों ने नाइट कर्फ्यू, विस्थापन, विद्युतीकरण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाया है। समिति ने मांगों पर कार्रवाई के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित करने की बात कही है।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और शासन-प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के संबंध में कितनी राहत मिलती है।

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