Top News

चॉक-डस्टर के साथ कुदाल और स्प्रेयर भी थामते हैं गुरुजी! जितेंद्र कुमार साहू की अनोखी पहल-बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखा रहे प्रकृति से जुड़ने का पाठ

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद/राजिम_आमतौर पर शिक्षक के हाथ में किताब, कलम और चॉक दिखाई देती है, लेकिन गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में एक शिक्षक ऐसे भी हैं, जो बच्चों को पढ़ाने के साथ विद्यालय की क्यारी और पौधों की भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। शासकीय प्राथमिक शाला सहिस पारा के शिक्षक जितेंद्र कुमार साहू इन दिनों अपनी इसी पहल को लेकर चर्चा में हैं।

जब गुरुजी बने माली...

वायरल हो रही तस्वीर में शिक्षक जितेंद्र कुमार साहू पीठ पर स्प्रेयर टांगकर स्कूल के किचन गार्डन में पौधों पर दवा का छिड़काव करते नजर आ रहे हैं। तस्वीर देखकर पहली नजर में लगता है कि कोई किसान अपने खेत की देखभाल कर रहा है, लेकिन यह नजारा एक शिक्षक की विद्यालय और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की कहानी बयां करता है।

पौधों में कीट लगने पर कर्मचारी का इंतजार करने के बजाय शिक्षक ने स्वयं स्प्रेयर उठाया और किचन गार्डन की देखभाल में जुट गए।

किचन गार्डन से बच्चों की थाली तक पहुंचेगी ताजी सब्जी

प्रधान पाठक श्रीमती रेवती देशमुख के मार्गदर्शन में स्कूल परिसर में किचन गार्डन और फूलवाड़ी विकसित की गई है। शिक्षक नेमीचंद साहू, सुश्री पुष्पा शुक्ला सहित पूरे स्टाफ का इसमें सहयोग मिल रहा है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रकृति से जोड़ना और किचन गार्डन में उगाई गई ताजी सब्जियों का उपयोग मध्यान्ह भोजन में करना है। यानी स्कूल की क्यारी सिर्फ हरियाली नहीं बढ़ा रही, बल्कि बच्चों की थाली तक पौष्टिकता पहुंचाने की दिशा में भी कदम है।

स्कूल की चारदीवारी से बाहर भी सेवा का जुनून

जितेंद्र कुमार साहू की पहचान सिर्फ शिक्षक के रूप में नहीं है। वे सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं।

वृक्षारोपण: सार्वजनिक स्थानों, श्मशान घाटों और विद्यालय परिसरों में पौधरोपण कर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

गौरैया संरक्षण: गौरैया के संरक्षण के लिए अपने खर्च से घोंसले तैयार कर लोगों को बांटते हैं और घरों में दाना-पानी रखने के लिए प्रेरित करते हैं।

रक्तदान: जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करने के साथ युवाओं को भी रक्तदान के प्रति जागरूक करते हैं।

गुरुजी की तस्वीर दे रही बड़ा संदेश

स्थानीय ग्रामीणों और पालकों का कहना है कि ऐसे शिक्षक कम ही देखने को मिलते हैं, जो बच्चों को किताबों का ज्ञान देने के साथ खुद कुदाल और स्प्रेयर उठाकर काम करने का उदाहरण भी पेश करें।

जितेंद्र कुमार साहू की यह पहल बताती है कि शिक्षक सिर्फ कक्षा में पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि अपने व्यवहार से बच्चों और समाज को भी सीख देता है।

किताबों से ज्ञान... क्यारी से संस्कार... और सेवा से समाज को संदेश-यही है गुरुजी जितेंद्र कुमार साहू की कहानी।

Previous Post Next Post