वन अमले की सतर्कता से बची युवा हाथी की जान, समय पर उपचार से टला संभावित मानव-हाथी संघर्ष
गरियाबंद_उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन अमले, हाथी मित्र दल और पशु चिकित्सकों की सतर्कता एवं संयुक्त प्रयासों से एक युवा नर हाथी की जान बचाने में बड़ी सफलता मिली। समय पर उपचार से न केवल हाथी को नया जीवन मिला, बल्कि संभावित मानव-हाथी संघर्ष की आशंका भी टल गई।
झुंड से बिछड़ने के बाद बिगड़ी तबीयत
करीब 6 से 7 वर्ष आयु का यह युवा नर हाथी नवंबर 2025 में ओडिशा से छत्तीसगढ़ आए सिकासार हाथी दल से बिछड़ गया था। लंबे समय तक अकेले भटकने के कारण उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने लगा। कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र में निगरानी कर रहे हाथी मित्र दल ने सबसे पहले हाथी के असामान्य व्यवहार को देखा। जांच में पता चला कि हाथी कई दिनों से मल त्याग नहीं कर पा रहा था और भोजन निगलने में भी उसे कठिनाई हो रही थी।
वन अमले ने शुरू की लगातार निगरानी
वन कर्मचारियों ने लगातार निगरानी करते हुए पाया कि हाथी कुल्हाड़ीघाट से धवलपुर वनमंडल होते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अर्सिकन्हार परिक्षेत्र तक पहुंच गया। स्थिति गंभीर होने पर टाइगर रिजर्व के उप संचालक के निर्देश पर वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन और डॉ. राकेश वर्मा के नेतृत्व में विशेष चिकित्सकीय दल गठित किया गया।
विशेष टीम ने किया इलाज, मिली राहत
चिकित्सकों ने वन अमले के साथ हाथी का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा उल्टी के नमूने एकत्र कर कृमि संक्रमण सहित अन्य संभावित कारणों की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। इसके बाद तौरेंगा परिक्षेत्र में पांच से सात दिनों तक हाथी का गहन उपचार और लगातार निगरानी की गई। उपचार का सकारात्मक असर दिखा और लगभग 10 से 15 दिनों के भीतर हाथी ने नरम मक्का सहित अन्य खाद्य सामग्री खाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसका स्वास्थ्य पूरी तरह सुधरने लगा।
कैमरा ट्रैप में दिखा पूरी तरह स्वस्थ
जनवरी-फरवरी 2026 में अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE-2026) के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में यह हाथी कई बार स्वस्थ अवस्था में कैद हुआ। तस्वीरों से पुष्टि हुई कि उपचार के बाद वह सामान्य रूप से जंगल में विचरण कर रहा था।
अप्रैल में फिर अपने झुंड से मिला
सबसे सुखद बात यह रही कि अप्रैल 2026 में सिकासार हाथी दल ने इस युवा नर हाथी को दोबारा अपने झुंड में स्वीकार कर लिया। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते उपचार नहीं होता तो कमजोर और अकेला हाथी भोजन की तलाश में गांवों की ओर रुख कर सकता था, जिससे गंभीर मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बन सकती थी।
वन विभाग ने टीम की सराहना की
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस सफलता का श्रेय हाथी मित्र दल, क्षेत्रीय वन कर्मचारियों तथा वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन और डॉ. राकेश वर्मा की समर्पित सेवाओं को दिया है। यह घटना दर्शाती है कि वैज्ञानिक निगरानी, त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से वन्यजीव संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है।





