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खसरा विवाद बना दर्द की दास्तां-दूसरी बार भूख हड़ताल पर मुरहा नागेश!

गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद 

गरियाबंद_पुश्तैनी जमीन के हक की लड़ाई में अमलीपदर तहसील के खरीपथरा गांव के मुरहा नागेश ने फिर एक बार भूख हड़ताल शुरू कर दी है। कड़कती ठंड में परिवार के साथ जिला मुख्यालय के गांधी मैदान में बीती रात से उन्होंने अनशन शुरू किया है।

कलेक्टर ने बनाई जांच टीम — 10 अधिकारी लगे जमीन तलाशने में

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने एसडीएम, तहसीलदार समेत 10 सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम अब गांव जाकर बंदोबस्त रिकॉर्ड सुधार और वास्तविक जमीन की पहचान में जुट गई है।

पुरानी कहानी — आदेश रद्द और कब्जे पर विवाद

मुरहा नागेश के नाम से खसरा क्रमांक 1/83 में 2.680 हेक्टेयर जमीन दर्ज है। इसी जमीन पर मोतीराम समेत अन्य लोगों ने कब्जा करने की कोशिश की थी। अगस्त महीने में जब मुरहा ने पहली बार भूख हड़ताल की थी, तब तहसीलदार ने उसे कब्जा दिलाया था। लेकिन अनावेदकों ने एसडीएम कोर्ट में अपील की और तहसीलदार का आदेश निरस्त करा लिया।

दोबारा दिलाया कब्जा — फिर चौपट हुई फसल

प्रशासन ने दोबारा मुरहा को उसकी जमीन पर कब्जा दिलाया और उसने फसल भी बो दी। लेकिन विरोधियों ने इस बार उसकी पूरी फसल चौपट कर दी। अब मुरहा फिर से उसी जमीन पर स्थायी कब्जे की मांग को लेकर गांधी मैदान में धरने पर बैठा है।

बंदोबस्त की गड़बड़ी बनी परेशानी की जड़

जांच में यह सामने आया है कि 1954 से लेकर 1986 तक के रिकॉर्ड में खसरा क्रमांक 1/83 में मुरहा नागेश का नाम दर्ज है। लेकिन 1990 में बंदोबस्त सुधार के दौरान इस खसरे को दो हिस्सों — 778 और 682 — में विभाजित कर दिया गया।यही वजह है कि अब इस जमीन पर पांच लोगों के नाम दर्ज हैं, जिससे मामला राजस्व विभाग के लिए सिरदर्द बन गया है।

प्रशासन के लिए चुनौती — कब मिलेगा न्याय?

लगातार दूसरी बार भूख हड़ताल पर बैठे मुरहा नागेश न्याय की उम्मीद लगाए हैं। सवाल यह है कि आखिर पुश्तैनी हक के इस विवाद का समाधान कब होगा?