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MAINPUR NEWS: पक्के मकानों की छत पर तंबू, नीचे मंडराता हाथियों का खतरा; अलर्ट मिलते ही बच्चों-महिलाओं को भेजते हैं ऊपर

40 से ज्यादा हाथियों की मौजूदगी से दहशत, फसल से लेकर घरों तक को नुकसान; जान बचाने ग्रामीणों ने निकाला अनोखा रास्ता


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद

मैनपुर_पक्के मकान की छत पर तिरपाल से बनाया गया यह छोटा-सा तंबू... हाथी प्रभावित इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए इन दिनों महज आश्रय नहीं, बल्कि मुसीबत की घड़ी में जान बचाने का सहारा बन गया है। जैसे ही एलर्ट एप या हाथी मित्र के जरिए जंगल में हाथियों की लोकेशन की जानकारी मिलती है, कच्चे मकानों में रहने वाले ग्रामीण आसपास के पक्के मकानों की छत पर बने इन तंबुओं का रुख कर लेते हैं।

दो दलों में घूम रहे 40 से ज्यादा हाथी

इन दिनों हाथी अभयारण्य की सीमा से लगे सामान्य वन मंडल के जंगलों में हाथियों की गतिविधियां बनी हुई हैं। छिंदौला, डंडईपानी, खोलपारा, सिहार, दबनई, फरसेरा और गिरहोला समेत आसपास के गांवों के ग्रामीण हाथियों की मौजूदगी को लेकर सतर्क हैं। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में दो अलग-अलग दलों में 40 से ज्यादा हाथियों की मौजूदगी की सूचना है।

हाथियों की लोकेशन की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों की पहली कोशिश अपनी और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। खासकर बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना प्राथमिकता बन जाती है।

फसल से लेकर घरों तक पहुंच जाते हैं हाथी

ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। मक्का की फसल और केले के पेड़ हाथियों के निशाने पर आ जाते हैं। कई बार भोजन की तलाश में हाथी ग्रामीणों के घरों तक भी पहुंच जाते हैं और महुआ तथा चावल को नुकसान पहुंचाने के साथ मकानों को भी क्षतिग्रस्त कर देते हैं।

ऐसे में हाथी प्रभावित करीब 17 गांवों में ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा के लिए अलग-अलग इंतजाम किए हैं। कई पक्के मकानों की छत पर तिरपाल लगाकर अस्थायी तंबू बनाए गए हैं, जहां हाथियों की आवाजाही की सूचना मिलने पर बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती है।

अलर्ट सिस्टम से मिल रही हाथियों की लोकेशन

वन विभाग भी मानता है कि हाथी बड़ा और शक्तिशाली वन्यजीव है, इसलिए उसकी गतिविधियों का अनुमान हमेशा आसानी से नहीं लगाया जा सकता। मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए विभाग की टीम और अलर्ट एप/हाथी मित्र व्यवस्था के जरिए ग्रामीणों को हाथियों की लोकेशन और संभावित गतिविधियों की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।


ग्रामीणों का कहना है कि अलर्ट मिलने से समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में मदद मिलती है। हालांकि फसल और संपत्ति के नुकसान की समस्या अभी भी बनी हुई है। विभाग की ओर से नियमानुसार नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया की जा रही है।

हाथियों के बीच जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच यह दूरी भले ही कुछ किलोमीटर की हो, लेकिन ग्रामीणों के लिए हर अलर्ट के साथ सबसे बड़ा सवाल यही होता है—आज रात परिवार सुरक्षित रहेगा या नहीं?

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