घुमरापदर में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं एक ही कमरे में; जर्जर छत से गिर रही पपड़ी, हादसे का मंडरा रहा ख
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| AI जनरेट फोटो |
| गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क गरियाबंद |
मैनपुर_ सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन मैनपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला घुमरापदर की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। यहां पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं महज एक कमरे में संचालित हो रही हैं। स्कूल में दर्ज 28 बच्चे इसी सीमित जगह में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
जर्जर भवन से गिर रही पपड़ी, बच्चों पर मंडरा रहा खतरा
स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है कि छत और दीवारों से पपड़ी निकलकर गिर रही है। बच्चों को इससे बचाने के लिए स्कूल में कपड़े का पर्दा तक बांधकर शैक्षणिक कार्य संचालित करना पड़ रहा है। ऐसे हालात में कभी भी पपड़ी का बड़ा हिस्सा गिरने से बच्चों के घायल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक कमरे में पांच कक्षाएं, पढ़ाई भी हो रही प्रभावित
सबसे बड़ी समस्या यह है कि कक्षा पहली से पांचवीं तक के सभी विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठाया जा रहा है। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों के लिए अलग-अलग कक्ष नहीं होने से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। एक कक्षा की पढ़ाई की आवाज दूसरी कक्षा तक पहुंचती है, जिससे बच्चों और शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
28 बच्चों की चिंता, फिर भी जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं?
स्कूल में 28 बच्चों की दर्ज संख्या है। सवाल यह है कि जब इतने बच्चों का भविष्य इसी स्कूल से जुड़ा है, तो अब तक उनके लिए सुरक्षित और पर्याप्त भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों और पालकों के बीच भी इस स्थिति को लेकर चिंता है।
कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन?
घुमरापदर के बच्चों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक वे जर्जर भवन और एक कमरे में पूरी पांच कक्षाओं की मजबूरी के बीच पढ़ाई करेंगे? विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद यदि अब तक ठोस पहल नहीं हुई है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।
बच्चों के भविष्य की नींव जिस स्कूल में रखी जा रही है, अगर उसी स्कूल की छत और दीवारें खतरे में हों, तो जिम्मेदारों को अब सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि तत्काल समाधान की जरूरत है।
अब देखना होगा_
क्या विभाग घुमरापदर के 28 बच्चों के लिए नया और सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराएगा, या फिर ये बच्चे इसी जर्जर भवन में खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे?





