मैनपुर विकासखंड के बनवापारा-खासरपारा मार्ग पर बरसाती नाला बना मुसीबत, तीन महीने तक जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर छात्र-छात्राएं, ग्रामीणों ने पुलिया निर्माण की उठाई मांग.....
गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़
गरियाबंद_शिक्षा को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड की एक तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। ग्राम पंचायत साल्हेभांटा के बनवापारा से खासरपारा के बीच स्थित बरसाती नाला आज भी स्कूली बच्चों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। हर दिन मासूम छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर इस नाले को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं।
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| छात्र/छात्रा स्कूल नाला पार करते हुए |
बरसात शुरू होते ही नाले का जलस्तर बढ़ जाता है। कई दिनों तक कमरभर पानी बहने के कारण बच्चों को उसी पानी के बीच होकर स्कूल जाना पड़ता है। छोटे-छोटे बच्चे बस्ता सिर पर रखकर किसी तरह नाला पार करते हैं। तेज बहाव के दौरान कई बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के तीन महीने यही हालात बने रहते हैं।
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| नाला में छात्र पानी को पार करते हुए |
अभिभावक भी हर दिन रहते हैं चिंता में
नाले का बहाव तेज होने पर अभिभावक खुद बच्चों को हाथ पकड़कर या कंधे पर बैठाकर नाला पार कराते हैं। कई बार माता-पिता बच्चों के स्कूल से लौटने तक चिंतित रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कभी अचानक पानी का बहाव बढ़ जाए तो बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सड़क बनी, लेकिन पुलिया अब भी अधूरी कड़ी
पूर्व जनपद सदस्य कल्याण ओटी ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत सड़क का निर्माण तो हो गया, लेकिन बरसाती नाले पर पुलिया नहीं बनने से सड़क का पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। बरसात के दिनों में यह मार्ग बाधित हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों के साथ-साथ ग्रामीणों, किसानों और मरीजों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
पढ़ाई पर भी पड़ रहा सीधा असर
ग्रामीणों के अनुसार कई बार तेज बारिश के कारण बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते। इससे उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है और परीक्षाओं के दौरान भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शिक्षा का अधिकार तभी
सार्थक होगा, जब बच्चों को सुरक्षित तरीके से विद्यालय पहुंचने की सुविधा मिले।
ग्रामीणों ने उठाई पुलिया निर्माण की मांग
रूप सिंह मरकाम ने कहा कि यदि जल्द पुलिया का निर्माण नहीं हुआ तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल पुलिया निर्माण कराने की मांग की है।
शिक्षा विभाग और प्रशासन से बड़ा सवाल
जब इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे आवागमन करते हैं तो आखिर अब तक इस बरसाती नाले पर पुलिया क्यों नहीं बन सकी? हर साल बरसात में यही समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया। बच्चों की सुरक्षा और निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसियों की भी जिम्मेदारी है।
अब देखना यह होगा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए शासन-प्रशासन इस मांग पर कितनी जल्द कार्रवाई करता है, ताकि आने वाले वर्षों में मासूमों को अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने की मजबूरी से मुक्ति मिल सके।



