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गरियाबंद में गुमशुदा बेटे के लिए एक मां की करुण गुहार… 28 दिनों से राह देख रही मां, बोली कोई मेरे बेटे को ढूंढ दो ।


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद_कहते हैं मां की दुआओं में इतनी ताकत होती है कि वह अपने बच्चों पर आने वाली हर मुसीबत से लड़ जाती है, लेकिन जब वही मां अपने बिछड़े बेटे को तलाशने के लिए बेबस होकर दुनिया से गुहार लगाने लगे, तो उसके दर्द का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। गरियाबंद में इन दिनों एक मां की ऐसी ही दर्दभरी कहानी सामने आई है। उसका 38 वर्षीय दिव्यांग बेटा जीवन निषाद पिछले 28 दिनों से लापता है। बेटे के घर लौटने की उम्मीद में परिवार की निगाहें हर आने-जाने वाले रास्ते पर टिकी हैं।

हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही मां की बेचैनी_

मामला गरियाबंद थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक जीवन निषाद पिता सुखित निषाद, उम्र 38 वर्ष, निवासी दर्रीपारा, कोचबाय, जिला गरियाबंद 3 अक्टूबर 2026 को जिला उपजेल गरियाबंद के पास से अचानक कहीं लापता हो गया। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है।

बताया गया है कि जीवन की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह दिव्यांग भी है। ऐसे में उसके कहीं अकेले भटकने और अपनी पहचान या घर का पता ठीक से नहीं बता पाने की आशंका परिजनों की चिंता बढ़ा रही है। परिवार के लिए यह सिर्फ एक गुमशुदगी का मामला नहीं, बल्कि हर दिन बढ़ता इंतजार और अनिश्चितता से भरा संघर्ष बन गया है।

मां की अपील- कोई तो मेरे बेटे को घर पहुंचा दो_

एक तरफ जहां परिवार अपने स्तर पर जीवन की तलाश में जुटा है, वहीं अब उसकी मां ने आम लोगों से भावुक अपील की है। परिवार चाहता है कि जीवन की तस्वीर अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, ताकि कहीं किसी की नजर उस पर पड़ जाए और उसके घर लौटने का रास्ता खुल सके। किसी अनजान व्यक्ति के लिए यह महज एक तस्वीर हो सकती है, लेकिन एक मां के लिए इसी तस्वीर में उसकी पूरी दुनिया बसी है। परिवार की उम्मीद अब आम लोगों की मदद पर टिकी है।

जानकारी देने वाले को मिलेगा उचित इनाम_

परिवार ने घोषणा की है कि जीवन निषाद को खोजने अथवा उसके संबंध में पुख्ता जानकारी देने वाले व्यक्ति को उचित सम्मान और पारितोषिक दिया जाएगा। यदि आपको जीवन निषाद कहीं दिखाई दें या उनके संबंध में कोई जानकारी मिले तो इन मोबाइल नंबरों पर तत्काल संपर्क करें ।9243366971/9202195811 परिवार ने लोगों से अपील की है कि इस खबर और तस्वीर को अपने सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और परिचितों के बीच अधिक से अधिक साझा करें।

हो सकता है आपकी एक शेयर की हुई पोस्ट किसी ऐसे व्यक्ति तक पहुंच जाए, जिसके पास जीवन के बारे में कोई जानकारी हो। एक मां की उम्मीद अभी टूटी नहीं है। उसे आज भी इंतजार है कि कोई उसके बेटे को सुरक्षित वापस घर पहुंचाने में मदद करेगा।

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