गरियाबंद में पीवी एप से फसल सर्वेक्षण कराने के आदेश पर बढ़ा विवाद, 35 मैदानी अधिकारियों के भरोसे चल रहा कृषि विभाग:तकनीकी खामियों और कर्मचारियों की कमी का दिया हवाला
गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़
गरियाबंद_खरीफ फसल गिरदावरी 2026-27 को लेकर गरियाबंद जिले में प्रशासनिक स्तर पर चल रही कवायद के बीच अब कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों ने भी विरोध शुरू कर दिया है। पीवी एप के माध्यम से फसल सत्यापन की ड्यूटी लगाए जाने से नाराज कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने अपर कलेक्टर एवं उपसंचालक कृषि को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को इस कार्य से मुक्त रखने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि ड्यूटी नहीं हटाई गई तो कृषि विभाग के नियमित कार्य और योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित होगा।
114 पद स्वीकृत, 52 पर ही तैनाती; 35 मैदानी अधिकारियों के भरोसे काम
संघ ने ज्ञापन में जिले में कृषि अमले की कमी का मुद्दा उठाते हुए बताया कि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के कुल 114 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 52 पद ही भरे हुए हैं। वहीं, जिले के कृषि विभाग का मैदानी कामकाज महज 35 अधिकारियों के भरोसे संचालित हो रहा है।
ऐसे में इन अधिकारियों को फसल गिरदावरी के कार्य में लगाने से किसानों को मिलने वाली विभागीय सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। संघ का कहना है कि मैदानी अधिकारी पहले से ही किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने, बीज-खाद की उपलब्धता, फसल संबंधी सलाह और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जुटे हुए हैं। अतिरिक्त राजस्व ड्यूटी से इन कामों में बाधा आ सकती है।
पटवारी-आरआई के बाद अब कृषि अधिकारियों पर जिम्मेदारी
खरीफ फसल गिरदावरी 2026-27 में पीवी एप के जरिए भौतिक सत्यापन कराने की प्रक्रिया को लेकर असहमति सामने आई है। संघ के अनुसार, पहले पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों ने इस कार्य को लेकर आपत्तियां जताई थीं। इसके बाद अब ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की ड्यूटी लगाए जाने से कृषि अमले में नाराजगी है।
संघ का कहना है कि कृषि विस्तार अधिकारियों का मूल कार्य कृषि संबंधी योजनाओं का संचालन और किसानों को तकनीकी सहायता देना है। उन्हें राजस्व विभाग के नक्शा-बटांकन और खसरा सीमांकन संबंधी कार्यों का विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ऐसे में उनसे राजस्व संबंधी फसल सत्यापन कराना व्यावहारिक नहीं है।
तीन साल पुराने नक्शे से कैसे होगी सही खसरे की पहचान?
पीवी एप की तकनीकी खामियों को लेकर संघ ने कई सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के मुताबिक, भुइयां पोर्टल पर उपलब्ध नक्शा लगभग तीन वर्ष पुराना है। इस दौरान जमीनों के विभाजन से बने कई नए खसरों का बटांकन नक्शे में दर्ज नहीं है।
ऐसी स्थिति में मौके पर खसरे की सही पहचान और उसकी वास्तविक सीमाओं का निर्धारण करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। संघ ने कहा कि बिना सीमांकन और किसान की मौजूदगी के सही खसरे की पहचान में परेशानी आएगी। इससे सर्वेक्षण के दौरान त्रुटियों की आशंका भी बनी रहेगी।
जलभराव वाले खेतों में चारों कोनों की लाइव फोटो लेने की बाध्यता
कृषि अधिकारियों ने फसल सर्वेक्षण के लिए निर्धारित प्रक्रिया को भी अव्यावहारिक बताया है। वर्तमान में खेतों में धान की फसल खड़ी है और कई स्थानों पर भारी जलभराव की स्थिति है। पीवी एप के जरिए सत्यापन के दौरान खेत के चारों कोनों में जाकर जीपीएस लोकेशन के साथ लाइव फोटो लेने की बाध्यता बताई गई है।
संघ के अनुसार, पानी और कीचड़ से भरे खेतों में चारों कोनों तक पहुंचना जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में इस कार्य को कराना मैदानी अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती है। संघ ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वेक्षण की तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इस आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।
कृषि कार्य प्रभावित होने की चेतावनी, मूल दायित्वों तक सीमित रखने की मांग
कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को पीवी एप से गिरदावरी कार्य की ड्यूटी से मुक्त रखा जाए। संघ का कहना है कि सीमित मैदानी अमले पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने से कृषि विभाग की योजनाओं और किसानों से जुड़े नियमित कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा।
संघ ने स्पष्ट किया है कि कृषि अधिकारियों को उनके मूल विभागीय दायित्वों के तहत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने, बीज-खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे कार्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।
अब प्रशासन के निर्णय पर टिकी निगाहें
गिरदावरी ड्यूटी को लेकर कृषि अधिकारियों की आपत्तियों और ज्ञापन के बाद अब प्रशासन के निर्णय पर निगाहें टिकी हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो कृषि विभाग का नियमित कामकाज प्रभावित होगा। ऐसे में फसल सत्यापन की प्रक्रिया और कृषि विभाग के मैदानी कार्यों के बीच समन्वय बनाना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।

