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GARIYABAND NEWS: NH-130C पर ‘साइड’ लेने गए तो गड्ढा स्वागत करेगा! ट्रैक्टर पलटते-पलटते बचा, सड़क बनी डेंजर जोन

जंगल के बीच संकरी सड़क, किनारों पर जानलेवा गड्ढे; मरम्मत के नाम पर मिट्टी डालो और बारिश में फिर ‘गायब’-आखिर कब बनेगी सुरक्षित सड़क?


गजानंद कश्यप छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़

गरियाबंद_ अभनपुर से राजिम, बरदुला और देवभोग होते हुए ओडिशा को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग NH-130C इन दिनों सड़क कम और वाहन चालकों की परीक्षा ज्यादा लेता नजर आ रहा है। खासकर झरियाबाहरा से मदानंगमुड़ा के बीच सड़क की हालत देखकर ऐसा लगता है कि यहां वाहन चलाने से पहले चालक को ड्राइविंग लाइसेंस के साथ-साथ किस्मत भी मजबूत रखनी पड़ती है।

घने जंगलों के बीच से गुजरने वाली यह सड़क कई जगह इतनी संकरी है कि सामने से बड़ा वाहन आ जाए तो सवाल यह नहीं रहता कि साइड कहां दें, सवाल यह होता है कि गाड़ी बचाएं या गड्ढा!

आज ट्रैक्टर था...कल कोई बड़ा हादसा न हो जाए

इसी मार्ग पर सड़क किनारे बने गड्ढे में ट्रैक्टर का पहिया धंस गया। ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलटने की स्थिति में पहुंच गया, हालांकि चालक की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया।

घटना के बाद एक बार फिर सड़क के किनारों की बदहाली सामने आ गई है। अगर ट्रैक्टर जैसा वाहन गड्ढे में फंसकर पलटने की स्थिति में पहुंच सकता है, तो तेज रफ्तार दोपहिया, कार, यात्री बस या भारी वाहन के लिए खतरा कितना बड़ा हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

सड़क संकरी, गड्ढे चौड़े...साइड लें तो खतरा!

स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों के मुताबिक झरियाबाहरा से मडगांवमुड़ा के बीच कई जगह सड़क की चौड़ाई कम है। सामने से ट्रक या बस आने पर छोटे वाहनों को मजबूरी में सड़क के किनारे उतरना पड़ता है। लेकिन यहां सड़क के किनारे उतरना भी किसी ‘स्टंट’ से कम नहीं है।

किनारों का डामर उखड़ चुका है, बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और कई जगह सड़क के बाहर खाई जैसी स्थिति नजर आती है। ऐसे में जरा सा पहिया नीचे गया और वाहन का संतुलन बिगड़ना तय माना जा रहा है।

मरम्मत का ऐसा तरीका...बारिश आई और काम गया!

सड़क की हालत सुधारने के लिए कई जगह गड्ढों में मिट्टी डालकर काम चलाने की कोशिश की जाती है। यहां मामला थोड़ा दिलचस्प है-मिट्टी डाली जाती है, बारिश आती है और मिट्टी अपना रास्ता पकड़ लेती है।

फिर वही गड्ढा, वही परेशानी और वाहन चालक फिर उसी खतरे के सामने। अगर सड़क के किनारे की समस्या का स्थायी समाधान करना है तो केवल मिट्टी डालना पर्याप्त नहीं होगा। शोल्डर को मजबूत करना, आवश्यक जगहों पर चौड़ीकरण करना और पक्की मरम्मत करना जरूरी है।

ओडिशा जाने वाली ‘लाइफलाइन’, लेकिन हालत देखकर सवाल जरूरी

NH-130C केवल स्थानीय ग्रामीणों के आवागमन का रास्ता नहीं है। यह छत्तीसगढ़ को ओडिशा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रास्ते से रोजाना यात्री बसों, ट्रकों, मालवाहक वाहनों, कारों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही होती है।

ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग पर सड़क के किनारों की लगातार खराब होती स्थिति को नजरअंदाज करना कई सवाल खड़े करता है।सड़क का निर्माण और मरम्मत केवल डामर बिछाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। सड़क के किनारे सुरक्षित हों, वाहनों को साइड देने की पर्याप्त जगह मिले और बारिश के पानी की निकासी हो-यह भी उतना ही जरूरी है।

आज तक किनारों की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं?

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के किनारों की यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सवाल यह है कि आखिर आज तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया? हर बारिश के बाद सड़क के किनारे फिर टूटते हैं, गड्ढे फिर उभरते हैं और वाहन चालक फिर उसी जोखिम के बीच सफर करने को मजबूर होते हैं।

ग्रामीणों और राहगीरों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर सड़क के दोनों किनारों की वास्तविक स्थिति का आकलन करे और अस्थायी मिट्टी डालने के बजाय स्थायी मरम्मत, शोल्डर निर्माण तथा आवश्यक चौड़ीकरण का काम कराया जाए। क्योंकि सड़क पर गड्ढा छोटा हो सकता है, लेकिन उससे होने वाला हादसा छोटा हो-यह जरूरी नहीं।

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